द्वारका में गहराया जल संकट, 15 दिनों से बूंद-बूंद पानी को तरसे लोग
पश्चिमी दिल्ली (जनवार्ता)|
राजधानी दिल्ली के सुनियोजित उपनगर द्वारका में गर्मी बढ़ते ही जल संकट गहरा गया है। पिछले करीब 15 दिनों से जलापूर्ति में भारी कटौती की जा रही है, जिससे लोगों का दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। हालात ऐसे हैं कि कई इलाकों में लोग भूजल और निजी टैंकरों पर निर्भर हो गए हैं, लेकिन टैंकर का पानी भी सीमित है और पीने योग्य नहीं माना जा रहा।

सबसे खराब स्थिति सेक्टर 11, पॉकेट-3 स्थित रॉयल ग्रीन अपार्टमेंट में देखने को मिल रही है। आरडब्ल्यूए अध्यक्ष रोहित ओबराय के मुताबिक, पिछले दो हफ्तों से पानी नाममात्र का मिल रहा है। सुबह करीब 45 मिनट आपूर्ति होती है, लेकिन दबाव इतना कम होता है कि पानी टंकियों तक नहीं पहुंच पाता। शिकायतों के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।
सेक्टर 17 के पीपल अपार्टमेंट में भी हालात लगातार बिगड़ते गए हैं। पहले जहां रोजाना चार घंटे पानी मिलता था, वहीं अब यह घटकर केवल आधा घंटा रह गया है। आरडब्ल्यूए अध्यक्ष कोमल भाटिया का कहना है कि कम दबाव के कारण पानी पूरी सोसाइटी तक नहीं पहुंच पा रहा। लोग मजबूरी में मंदिर परिसर से बाल्टियों में पानी भरकर घर ले जा रहे हैं।
द्वारका से सटे भरत विहार इलाके में स्थिति और गंभीर है। स्थानीय निवासी मारीदास प्रधान के अनुसार, जल बोर्ड से संपर्क करने पर केवल आश्वासन मिलता है, जबकि लोग निजी टैंकरों से पानी खरीदने को मजबूर हैं।
सेक्टर 23 के आईएफसीआई अपार्टमेंट के आरडब्ल्यूए अध्यक्ष मोहिंदर प्रकाश का कहना है कि मौजूदा जलापूर्ति कुल जरूरत का मात्र 30 प्रतिशत ही पूरा कर पा रही है। उनका आरोप है कि वर्ष 2015 के बाद से जल आपूर्ति में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई, जबकि आबादी तेजी से बढ़ी है।
वहीं, जल बोर्ड अधिकारियों का कहना है कि समस्या कुछ चुनिंदा सेक्टरों तक सीमित है और समाधान के प्रयास जारी हैं। अधिकारियों के अनुसार, जिन इलाकों में दिक्कत ज्यादा है, वे पाइपलाइन नेटवर्क के अंतिम छोर पर स्थित हैं, जिसके कारण पानी का दबाव कम हो जाता है। विभाग ने दावा किया है कि अगले सात दिनों में स्थिति में सुधार देखने को मिलेगा।

