BHU ट्रॉमा सेंटर में गलत मरीज पर लगा था चीरा,जांच में 14 दोषी,संस्थान ने मानी लापरवाही
वाराणसी(जनवार्ता)।
चिकित्सा विज्ञान संस्थान के ट्रॉमा सेंटर में मरीज की पहचान में हुई गंभीर चूक का मामला सामने आया है, जिसमें गलत मरीज को ऑपरेशन के लिए ले जाकर उसके कूल्हे पर चीरा लगा दिया गया। मामले की जांच के बाद संस्थान ने 14 चिकित्सकों और कर्मचारियों को लापरवाही का दोषी मानते हुए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार, 7 मार्च को अस्थि रोग ओटी में यह घटना तब हुई जब एक ही नाम की दो मरीजों को एक ही प्री-ऑपरेटिव रूम में रखा गया था। बलिया निवासी 71 वर्षीय राधिका देवी, जिनका ऑपरेशन न्यूरोसर्जरी विभाग में होना था, को गलती से अस्थि रोग विभाग के ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया। यहां उनकी पहचान की दोबारा पुष्टि किए बिना कूल्हे के ऑपरेशन के लिए चीरा लगा दिया गया।
हालांकि, चिकित्सकीय टीम को तुरंत गलती का एहसास हो गया और चीरे को बंद कर मरीज को वापस शिफ्ट कर दिया गया। संस्थान के अनुसार, एक्स-रे जांच में यह स्पष्ट हुआ कि मरीज की हड्डी की कोई सर्जरी नहीं की गई थी। बाद में टांके भी हटा दिए गए और मरीज सामान्य स्थिति में थीं।
घटना के 11 दिन बाद, 18 मार्च को न्यूरोसर्जरी विभाग में मरीज के स्पाइनल कॉर्ड के ट्यूमर का सफल ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के बाद मरीज को 10 दिन तक पोस्ट-ऑपरेटिव वार्ड में रखा गया, जहां उनकी हालत में सुधार दर्ज किया गया। लेकिन 27 मार्च को अचानक हृदयाघात आने से उनकी स्थिति बिगड़ गई और आईसीयू में उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
संस्थान प्रशासन का कहना है कि कूल्हे में लगाए गए चीरे को मरीज की मौत का कारण बताना सही नहीं है। वहीं, दूसरी मरीज वाराणसी निवासी 82 वर्षीय राधिका देवी की कूल्हे की सर्जरी 9 मार्च को सफलतापूर्वक की गई।
इस मामले में गठित फैक्ट फाइंडिंग समिति की रिपोर्ट के आधार पर संस्थान ने अस्थि रोग, एनेस्थीसिया, न्यूरोसर्जरी और नर्सिंग विभाग के कुल 14 कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मरीजों की पहचान सुनिश्चित करने हेतु कलाई टैग अनिवार्य करने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।

