यूथ में बढ़ रहा नाइट ईटिंग सिंड्रोम

यूथ में बढ़ रहा नाइट ईटिंग सिंड्रोम

वाराणसी (जनवार्ता)। देर रात तक मोबाइल चलाना, ओटीटी देखना और सोशल मीडिया स्क्रॉलिंग युवाओं की सेहत पर भारी पड़ रहा है। शहर में “नाइट ईटिंग सिंड्रोम” के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक यह केवल देर रात खाने की आदत नहीं, बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर समस्या बनती जा रही है।
मनोचिकित्सकों का कहना है कि युवाओं में देर रात भूख लगना, बार-बार स्नैकिंग करना और बिना कुछ खाए नींद न आना जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। इसका असर शरीर की सर्केडियम रिदम यानी बॉडी क्लॉक पर पड़ रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार अनियमित लाइफस्टाइल, देर रात तक मोबाइल चलाना, गेमिंग, पढ़ाई और नौकरी का तनाव इस समस्या की बड़ी वजह है। कई छात्र और युवा रात को “मी टाइम” मानकर वेब सीरीज देखते हुए जंक फूड खाते हैं, जिससे शरीर उसी समय भूख महसूस करने लगता है।
रात में भूख लगने पर ज्यादातर युवा ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप्स का सहारा लेते हैं। हॉस्टल और पीजी में रहने वाले छात्र इंस्टेंट नूडल्स, चिप्स, कोल्ड ड्रिंक और फ्रोजन फूड का ज्यादा सेवन कर रहे हैं। कुछ युवा पढ़ाई और गेमिंग के दौरान जागे रहने के लिए कॉफी और हाई शुगर फूड लेते हैं, जो धीरे-धीरे इमोशनल ईटिंग में बदल जाता है।
कॉलेज स्टूडेंट अकांक्षा बताती हैं कि एग्जाम के दौरान रात में मैगी खाने की आदत शुरू हुई थी, लेकिन अब बिना कुछ खाए नींद नहीं आती। वहीं गेमिंग करने वाले जगदीश का कहना है कि देर रात फास्ट फूड खाने से उनका वजन तेजी से बढ़ गया और नींद की परेशानी शुरू हो गई।
विशेषज्ञों के मुताबिक लगातार देर रात जागने और खाने से शरीर की प्राकृतिक घड़ी प्रभावित होती है। मोबाइल और लैपटॉप की ब्लू लाइट मेलाटोनिन हार्मोन को प्रभावित करती है, जिससे नींद देर से आती है। वहीं रात में भारी भोजन करने से मेटाबॉलिज्म भी बिगड़ता है।
डॉक्टरों के अनुसार इससे मोटापा, डायबिटीज, हाई बीपी, एंग्जायटी, डिप्रेशन, थकान और हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञ नियमित स्लीप साइकल, कम स्क्रीन टाइम, हेल्दी डाइट और फिजिकल एक्टिविटी अपनाने की सलाह दे रहे हैं।

rajeshswari
इसे भी पढ़े   काशी-तमिल संगमम 4.0 में सीबीसी की चित्र प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र
Shiv murti

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *