‘जब्त’ बस दौड़ती रही, गैंगरेप के बाद खुलासा
नई दिल्ली (जनवार्ता) । दिल्ली के रानी बाग इलाके में महिला से सामूहिक दुष्कर्म की घटना में इस्तेमाल हुई स्लीपर बस को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में पता चला है कि परिवहन विभाग की ओर से ‘डिजिटल इंपाउंड’ घोषित किए जाने के बावजूद बस बिहार से दिल्ली के बीच लगातार संचालित हो रही थी।

परिवहन विभाग के अनुसार बस पर परमिट, इंश्योरेंस और ओवरलोडिंग समेत कई नियमों के उल्लंघन में करीब चार लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। इनमें से केवल एक लाख रुपये जमा किए गए थे, जबकि तीन लाख रुपये बकाया होने पर बस को कागजों में जब्त दिखाया गया था। इसके बावजूद बस सड़क पर दौड़ती रही।
रिकॉर्ड के मुताबिक बस गोपालगंज की निजी कंपनी ‘साईं दृष्टि प्राइवेट लिमिटेड’ के नाम पर पंजीकृत है। बस मालिक की पहचान सिधवलिया थाना क्षेत्र के रामपुर सदौवा गांव निवासी हैप्पी मल्होत्रा के रूप में हुई है। बताया गया है कि टूरिस्ट परमिट वाली इस बस का इस्तेमाल नियमित यात्री सेवा में किया जा रहा था।
11 मई की रात इसी बस में ड्राइवर और कंडक्टर पर महिला से सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगा था। घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर बस को कब्जे में ले लिया।
अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि विभागीय कार्रवाई के बावजूद बस आखिर कैसे संचालित होती रही। मामले में अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

