विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस: माहवारी को लेकर जागरूकता और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान जरूरी
डॉ. मनोज कुमार तिवारी ने बताया— मासिक धर्म को लेकर चुप्पी तोड़ना समय की जरूरत
वाराणसी (जनवार्ता)। हर वर्ष 28 मई को मनाया जाने वाला ‘विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस’ महिलाओं और किशोरियों में माहवारी को लेकर जागरूकता बढ़ाने तथा इससे जुड़े सामाजिक कलंक को समाप्त करने का संदेश देता है। इस वर्ष की थीम “एक मासिक धर्म अनुकूल दुनिया के लिए एक साथ” रखी गई है। वरिष्ठ परामर्शदाता एआरटीसी, एसएस हॉस्पिटल, आईएमएस-बीएचयू के डॉ. मनोज कुमार तिवारी ने कहा कि मासिक धर्म एक प्राकृतिक एवं आवश्यक शारीरिक प्रक्रिया है, लेकिन आज भी समाज में इसे लेकर संकोच और गलत धारणाएं मौजूद हैं।


उन्होंने बताया कि मासिक धर्म के दौरान हार्मोनल बदलाव के कारण महिलाओं में शारीरिक और मानसिक दोनों तरह के प्रभाव देखने को मिलते हैं। मूड स्विंग, चिड़चिड़ापन, थकान, चिंता, अनिद्रा और उदासी जैसे लक्षण सामान्य हैं, लेकिन कई महिलाओं में यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है, जिसे प्रीमेंस्ट्रुअल डिस्फोरिक डिसऑर्डर (पीएमडीडी) कहा जाता है।
डॉ. तिवारी ने कहा कि स्वस्थ मासिक धर्म स्वच्छता अपनाना बेहद जरूरी है। सैनिटरी पैड को समय-समय पर बदलना, हाथों की साफ-सफाई, स्वच्छ अंडरवियर का प्रयोग तथा इस्तेमाल किए गए उत्पादों का सुरक्षित निपटान संक्रमण से बचाव में सहायक होता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि अत्यधिक दर्द, असामान्य रक्तस्राव या मानसिक तनाव महसूस हो तो चिकित्सकीय सलाह अवश्य लेनी चाहिए।
मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए उन्होंने संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, योग, पर्याप्त नींद और सीमित स्क्रीन टाइम पर जोर दिया। उनके अनुसार अत्यधिक मोबाइल उपयोग और अनियमित दिनचर्या हार्मोनल असंतुलन बढ़ाकर मासिक धर्म संबंधी समस्याओं को गंभीर बना सकती है।
डॉ. तिवारी ने कहा कि परिवार और समाज को माहवारी के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है, ताकि किशोरियां और महिलाएं बिना झिझक अपनी समस्याएं साझा कर सकें। उन्होंने अपील की कि मासिक धर्म को शर्म नहीं बल्कि स्वास्थ्य और जागरूकता से जोड़कर देखा जाए।

