हत्या हरण सरोवर: अनजाने पापों से मुक्ति की आस्था का अद्भुत तीर्थ, साल में सिर्फ एक दिन भरता है जल
सुलतानपुर (जनवार्ता)। उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर जिले के सूरापुर क्षेत्र स्थित विजेथुआ महावीर धाम का हत्या हरण सरोवर सदियों से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पवित्र सरोवर में स्नान करने से अनजाने में हुई जीव हत्या के पापों से मुक्ति मिलती है। इसी आस्था के चलते पापांकुश एकादशी पर यहां दूर-दूर से श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है।

मुख्य मंदिर के दक्षिण दिशा में स्थित हत्या हरण सरोवर अपनी अनोखी विशेषता के लिए भी प्रसिद्ध है। स्थानीय मान्यता है कि वर्ष के 364 दिनों तक यह सरोवर पूरी तरह सूखा रहता है, जबकि केवल पापांकुश एकादशी के दिन इसमें स्वतः जल प्रकट होता है। इसी दिन यहां स्नान का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।
श्रद्धालुओं का विश्वास है कि दैनिक जीवन में खेतों में काम करते समय, यात्रा के दौरान अथवा अन्य परिस्थितियों में अनजाने में हुई जीव हत्या के पापों के प्रायश्चित के लिए यह सरोवर सिद्ध तीर्थ है। इसी विश्वास के साथ श्रद्धालु यहां स्नान कर आत्मिक शांति और पापों से मुक्ति की कामना करते हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने समय-समय पर सरोवर में स्थायी रूप से जल बनाए रखने के प्रयास किए, लेकिन सभी प्रयास विफल रहे। ग्रामीण इसे ईश्वरीय चमत्कार मानते हैं और कहते हैं कि सरोवर में जल केवल निर्धारित तिथि पर ही प्रकट होता है।
हरिश्चंद्र घाट, काशी के अवधूत उग्र चण्डेश्वर कपाली महाराज के अनुसार हत्या हरण सरोवर साधारण जलाशय नहीं, बल्कि एक सिद्ध आध्यात्मिक तीर्थ है। उनका कहना है कि पापांकुश एकादशी के दिन ही इस सरोवर की आध्यात्मिक शक्ति जागृत होती है और उसी समय इसमें जल प्रकट होता है। अन्य दिनों में इसका सूखा रहना इसी दिव्य व्यवस्था का प्रतीक माना जाता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार विजेथुआ महावीर धाम वही स्थल है, जहां भगवान हनुमान ने राक्षस कालिनेमि का वध किया था। मान्यता है कि उसी घटना के प्रायश्चित स्वरूप हत्या हरण सरोवर की स्थापना हुई। इस धाम का उल्लेख गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानस में भी मिलता है। आस्था, इतिहास और पौराणिक परंपराओं से जुड़ा यह तीर्थ आज भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है।

