गुरु पूर्णिमा पर्व पर मां गंगा को गुरु स्वरूप मानने का दिया संदेश
वाराणसी (जनवार्ता)। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गंगा सेवक राजेश शुक्ला ने मां गंगा को जीवन की महान गुरु बताते हुए कहा कि सनातन संस्कृति में गंगा केवल एक पवित्र नदी नहीं, बल्कि जीवन, ज्ञान और मोक्ष प्रदान करने वाली आदि गुरु हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार गुरु अपने शिष्य के अज्ञान का नाश कर उसे सही मार्ग दिखाता है, उसी प्रकार मां गंगा मनुष्य के मन, विचार और आचरण को निर्मल बनाने की प्रेरणा देती हैं।


राजेश शुक्ला ने कहा कि मां गंगा का अविरल प्रवाह निरंतर आगे बढ़ते रहने, धैर्य बनाए रखने और जीवन में सकारात्मकता अपनाने का संदेश देता है। गंगा का जल केवल शारीरिक शुद्धि ही नहीं, बल्कि आत्मिक शांति, आत्मचिंतन और आंतरिक पवित्रता का भी माध्यम है।
उन्होंने कहा कि गंगा किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं करतीं। उनके तट पर आने वाले प्रत्येक व्यक्ति, पशु-पक्षी और साधक को समान रूप से आश्रय और स्नेह मिलता है। यही गुण एक आदर्श गुरु की पहचान भी है, जो बिना किसी भेदभाव के सभी को समान ज्ञान प्रदान करता है।
उन्होंने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर लोगों से मां गंगा की स्वच्छता, निर्मलता और अविरलता बनाए रखने का संकल्प लेने का आह्वान करते हुए कहा कि यदि हम गंगा के जीवन मूल्यों को अपने आचरण में उतारें तो समाज में शांति, करुणा, सद्भाव और मानवीय मूल्यों को और अधिक सुदृढ़ किया जा सकता है।

