वाराणसी में रासायनिक कचरे से मछलियों के डीएनए और लिवर पर खतरा
वाराणसी (जनवार्ता) । नदियों और जलाशयों में बढ़ते रासायनिक प्रदूषण को लेकर बीएचयू और आईआईटी बांबे के वैज्ञानिकों के संयुक्त अध्ययन में चिंताजनक तथ्य सामने आए हैं। शोध के अनुसार, पानी में मौजूद पर्सिस्टेंट ऑर्गेनिक पॉल्यूटेंट्स (पीओपीएस) स्थानीय सिंगी मछली के डीएनए, यकृत और मेटाबालिज्म को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

शोधकर्ताओं ने मछलियों को 21 दिनों तक पीओपीएस के अलग-अलग स्तर वाले पानी के संपर्क में रखा। जांच में उनकी लाल रक्त कोशिकाओं में माइक्रोन्यूक्लियस का स्तर बढ़ा मिला, जो डीएनए क्षति का संकेत है। अधिक मात्रा वाले समूह में एसजीपीटी, एसजीओटी और एएलपी जैसे लिवर एंजाइमों में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
अध्ययन में मछलियों के रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ने से मेटाबालिज्म पर भी प्रतिकूल प्रभाव के संकेत मिले। वहीं, लिवर ऊतकों में केआई-67 प्रोटीन की तीव्र प्रतिक्रिया पाई गई, जो क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की तेजी से मरम्मत की प्रक्रिया को दर्शाती है।
यह शोध प्रोसीडिंग्स ऑफ द इंडियन नेशनल साइंस अकादमी में प्रकाशित हुआ है। वैज्ञानिकों ने चेताया है कि जल स्रोतों में मौजूद जैविक प्रदूषक जलीय जीवों के लिए धीमे जहर की तरह काम कर रहे हैं। प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं हुआ तो जलीय पारिस्थितिकी के साथ खाद्य श्रृंखला के जरिए मानव स्वास्थ्य पर भी अप्रत्यक्ष खतरा बढ़ सकता है।

