घर खरीदने से पहले सावधान! एक गलती से सपना बन सकता है बर्बादी का कारण
जयपुर, (जनवार्ता)।
राजस्थान की राजधानी जयपुर में इन दिनों हजारों परिवारों के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है—क्या खरीदा हुआ घर भी कभी अचानक “अवैध” घोषित हो सकता है? हाल के दिनों में शहर के बाहरी इलाकों में चल रही कार्रवाई और जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) के बुलडोजर ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
दरअसल, 17 अप्रैल को राजस्थान हाउसिंग बोर्ड की टीम ने बीटू बाइपास से द्रव्यवती नदी तक फैली करीब 42 बीघा सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की। यह जमीन वर्ष 1989 में ही अधिग्रहित की जा चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद भू-माफियाओं ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर यहां कॉलोनियां विकसित कर प्लॉट बेच दिए।

इस मामले में कई खरीदारों का कहना है कि उन्होंने जमीन के दस्तावेज देखकर ही भुगतान किया, ऐसे में उनकी गलती कहां है? वहीं प्रशासन का कहना है कि जमीन खरीदते समय पूरी जांच-पड़ताल करना जरूरी है। यह मामला केवल अवैध कॉलोनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम की खामियों को भी उजागर करता है। तेजी से विकसित हो रही कॉलोनियों में कई बार भू-रूपांतरण (90-A) के नियमों का पालन नहीं किया जाता और बिना अनुमति प्लॉटिंग कर दी जाती है।
प्रेम और पार्वती जैसे कई परिवार आज अपने घर टूटने के डर में जी रहे हैं। उनका कहना है कि वे वर्षों से यहां रह रहे हैं और अब अचानक नोटिस देकर मकान तोड़ने की तैयारी की जा रही है। ऐसे में उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि अब वे कहां जाएं।
प्रशासन की ओर से साफ किया गया है कि केवल रजिस्ट्री होना ही पर्याप्त नहीं है। जमीन खरीदने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि भूमि का वैध रूपांतरण हुआ है या नहीं और संबंधित विकास प्राधिकरण से उसकी स्थिति की पुष्टि की गई है।
प्रॉपर्टी मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि घर या जमीन खरीदने से पहले प्रोजेक्ट की वैधता की जांच संबंधित प्राधिकरण और RERA की वेबसाइट पर जरूर करनी चाहिए। साथ ही, दस्तावेजों को मास्टर प्लान के अनुरूप सत्यापित कराना भी बेहद जरूरी है।
घर खरीदना जीवन का एक बड़ा फैसला होता है, लेकिन थोड़ी सी लापरवाही भविष्य में भारी नुकसान का कारण बन सकती है। ऐसे में निवेश से पहले हर पहलू की गंभीरता से जांच करना ही समझदारी है।

