बंगाल में बीजेपी की जीत के 5 नायक, जिन्होंने ढहा दिया ममता बनर्जी का किला

बंगाल में बीजेपी की जीत के 5 नायक, जिन्होंने ढहा दिया ममता बनर्जी का किला

कोलकाता (जनवार्ता)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने देश की राजनीति में बड़ा संदेश दिया है। शुरुआती रुझानों में भारतीय जनता पार्टी को करीब 200 सीटों की बढ़त मिलती दिखी, जबकि तृणमूल कांग्रेस 100 के आंकड़े से नीचे सिमटती नजर आई। 2021 में सत्ता से दूर रह गई बीजेपी ने इस बार आक्रामक रणनीति, मजबूत संगठन और बड़े चेहरों के दम पर ममता बनर्जी के गढ़ में बड़ी सेंध लगा दी।
इस ऐतिहासिक बढ़त के पीछे पांच ऐसे चेहरे रहे, जिन्होंने चुनावी रण को बीजेपी के पक्ष में मोड़ने में अहम भूमिका निभाई।

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प्रधानमंत्री Narendra Modi ने चुनाव प्रचार की कमान खुद संभाली। उन्होंने राज्य में 21 रैलियां और तीन बड़े रोड शो किए। टीएमसी के “बंगाल अस्मिता” नैरेटिव के मुकाबले पीएम मोदी ने स्थानीय संस्कृति और भावनाओं से जुड़ने की रणनीति अपनाई। झालमुड़ी खाते हुए आम लोगों से संवाद, हुगली नदी में बोटिंग और बंगाल के धार्मिक स्थलों पर पहुंचकर उन्होंने खुद को बंगाल की भावनाओं से जोड़ने की कोशिश की। उन्होंने थंथानिया कालीबाड़ी, दक्षिणेश्वर काली मंदिर, बेलूर मठ और मतुआ समुदाय के प्रमुख केंद्रों पर भी दर्शन किए।


केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah ने पूरे चुनावी अभियान की रणनीतिक कमान संभाली। उनके नेतृत्व में बीजेपी ने “परिवर्तन यात्रा” निकालकर राज्यभर में एंटी-इनकंबेंसी का माहौल तैयार किया। करीब 5,000 किलोमीटर लंबी इस यात्रा के जरिए भ्रष्टाचार, घुसपैठ और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को गांव-गांव तक पहुंचाया गया। सूत्रों के मुताबिक, शाह लगातार चुनावी वॉर रूम से फीडबैक लेते रहे और हर रैली के बाद समीक्षा भी करते थे।

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बीजेपी के संगठन महामंत्री Sunil Bansal ने पर्दे के पीछे रहकर संगठन को धार दी। उन्होंने मंडल और बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने पर फोकस किया। कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल, अंदरूनी मतभेदों को खत्म करना और माइक्रो मैनेजमेंट के जरिए वोटरों तक पहुंच बनाना उनकी रणनीति का अहम हिस्सा रहा।
केंद्रीय मंत्री Bhupender Yadav को बंगाल चुनाव में खास जिम्मेदारी दी गई थी। उन्होंने संगठन और सामाजिक समीकरणों को साधने का काम किया। भूपेंद्र यादव ने स्थानीय नेताओं के साथ समन्वय बनाकर बीजेपी के लिए जमीनी माहौल तैयार किया और कई सीटों पर उम्मीदवार चयन से लेकर प्रचार रणनीति तक अहम भूमिका निभाई।


बीजेपी की इस सफलता में सबसे बड़ी भूमिका जमीनी कार्यकर्ताओं की भी मानी जा रही है। बूथ स्तर पर लगातार सक्रिय कार्यकर्ताओं ने घर-घर संपर्क अभियान चलाया और मतदाताओं तक पार्टी का संदेश पहुंचाया। ग्रामीण क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने और पहली बार वोट करने वाले युवाओं को जोड़ने में कार्यकर्ताओं की मेहनत निर्णायक साबित हुई।


2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने जोरदार प्रचार किया था, लेकिन बहुमत से दूर रह गई थी। इस बार पार्टी ने उसी हार से सबक लेते हुए माइक्रो प्लानिंग, स्थानीय मुद्दों और संगठनात्मक मजबूती पर फोकस किया। नतीजा यह रहा कि बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला। अब सबकी नजर अंतिम नतीजों और इस जीत के राष्ट्रीय राजनीति पर पड़ने वाले असर पर टिकी है।

Shiv murti

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