देहरादून में हरियाली बचाने को सख्त नियम, भवन नक्शों में दिखाने होंगे पेड़ और प्राकृतिक संरचनाएं
देहरादून (जनवार्ता) । तेजी से बढ़ते शहरीकरण और घटती हरियाली के बीच मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब भवन निर्माण और ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं के लिए प्रस्तुत किए जाने वाले मानचित्रों में केवल प्रस्तावित निर्माण ही नहीं, बल्कि भूमि पर मौजूद पेड़ों, नालों, खालों, हाईटेंशन लाइन, रेलवे लाइन तथा अन्य स्थायी संरचनाओं का पूरा विवरण भी देना अनिवार्य होगा।
एमडीडीए द्वारा आर्किटेक्ट्स एवं ड्राफ्ट्समैन एसोसिएशन को जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि भविष्य में किसी भी मानचित्र में स्थल की वास्तविक स्थिति छिपाने या गलत जानकारी देने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में संबंधित नक्शा तत्काल निरस्त कर दिया जाएगा। साथ ही मानचित्र तैयार करने वाले आर्किटेक्ट या ड्राफ्ट्समैन को भविष्य के लिए अयोग्य घोषित किए जाने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
प्राधिकरण के संज्ञान में लगातार ऐसे मामले आ रहे थे, जिनमें ग्रीन एरिया तो दर्शाया जाता था, लेकिन भूखंड पर मौजूद पुराने और बड़े पेड़ों का उल्लेख नहीं किया जाता था। कई बार नालों, खालों और अन्य प्राकृतिक जल निकासी संरचनाओं को भी मानचित्रों से गायब कर दिया जाता था, जिससे पर्यावरणीय नुकसान की आशंका बढ़ जाती थी।
एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि अब प्रत्येक प्रस्तावित स्थल पर मौजूद पेड़ों की संख्या, उनकी प्रजाति और स्थिति का विस्तृत विवरण देना होगा। इसके अलावा बड़े आवासीय एवं ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में सड़क और पहुंच मार्ग के दोनों ओर पौधारोपण की योजना को भी मानचित्र का हिस्सा बनाया जाएगा। आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त पौधारोपण के प्रस्ताव शामिल करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि मानचित्र प्रस्तुत होने के बाद अधिकारियों द्वारा स्थल का भौतिक निरीक्षण किया जाएगा। यदि निरीक्षण के दौरान नक्शे और वास्तविक स्थिति में अंतर पाया गया तो संबंधित मानचित्र निरस्त कर दिया जाएगा तथा जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।
बीते एक दशक में देहरादून में तेजी से बढ़े निर्माण कार्यों के कारण बड़ी संख्या में पेड़ों की कटान हुई है। पर्यावरणविद लगातार चेतावनी देते रहे हैं कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए बिना शहर की जलवायु और प्राकृतिक पहचान पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में एमडीडीए का यह निर्णय शहर की हरित विरासत और प्राकृतिक जल निकासी तंत्र को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इससे निर्माण परियोजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और विकास कार्यों के दौरान पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी करना आसान नहीं होगा।
नए नियमों के तहत मानचित्रों में मौजूदा पेड़ों की संख्या और उनकी प्रजाति, हाईटेंशन लाइन, नाले और खाले, रेलवे लाइन, पहले से मौजूद संरचनाएं, पहुंच मार्ग, पार्किंग क्षेत्र तथा प्रस्तावित पौधारोपण योजना का स्पष्ट उल्लेख करना होगा।


