स्मार्ट मीटर अभियान पर ब्रेक, तकनीकी रिपोर्ट तक मीटर बदलने पर रोक
लखनऊ (जनवार्ता)। उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए यूपी पावर कॉरपोरेशन ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने के अभियान पर फिलहाल रोक लगा दी है। निगम के अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल ने शनिवार देर रात सभी डिस्कॉम को निर्देश जारी करते हुए कहा कि तकनीकी कमेटी की अंतिम रिपोर्ट आने तक किसी भी उपभोक्ता का पुराना मीटर न तो जबरन और न ही स्वेच्छा से बदला जाएगा।

निगम की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह रोक अस्थायी है और उच्चस्तरीय तकनीकी समिति की रिपोर्ट के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा। हालांकि नए बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया जारी रहेगी और नए कनेक्शन स्मार्ट प्रीपेड मीटर के माध्यम से ही दिए जाएंगे।
पिछले कुछ महीनों से प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्मार्ट मीटरों को लेकर विरोध बढ़ रहा था। उपभोक्ताओं का आरोप है कि बिना पूर्व सूचना या सहमति के उनके पुराने मीटर हटाकर नए प्रीपेड मीटर लगाए गए। कई उपभोक्ताओं ने स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिल में वृद्धि की शिकायत भी की है। इसके अलावा प्रीपेड प्रणाली में बैलेंस समाप्त होते ही बिना चेतावनी बिजली कटने से लोगों में नाराजगी बढ़ी है।
बढ़ते विरोध और शिकायतों को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में ऊर्जा विभाग के साथ समीक्षा बैठक की थी। इसके बाद 12 अप्रैल को एक उच्चस्तरीय तकनीकी समिति का गठन किया गया, जिसे स्मार्ट मीटर की सटीकता, बिलिंग प्रणाली और उपभोक्ता शिकायतों की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में अब तक करीब 78 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जिनमें से 70.50 लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटर हैं। निगम का लक्ष्य पूरे प्रदेश में प्रीपेड सिस्टम लागू करना है, लेकिन फिलहाल तकनीकी समस्याओं और जन विरोध के चलते अभियान की रफ्तार थम गई है।
पावर कॉरपोरेशन ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ताओं के हित सर्वोपरि हैं और तकनीकी समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की रणनीति तय की जाएगी। अब प्रदेश के उपभोक्ताओं की नजर इस रिपोर्ट पर टिकी है, जो स्मार्ट मीटर योजना के भविष्य की दिशा तय करेगी।

