पंचकोसी परिक्रमा से पहले शिवपुर की धर्मशालाओं में बदहालव्यवस्थाएं, श्रद्धालुओं की बढ़ी चिंता
वाराणसी (जनवार्ता)। आगामी 17 मई से शुरू हो रहे पुरुषोत्तम मास और पंचकोसी परिक्रमा को लेकर श्रद्धालुओं की तैयारियां तेज हैं, लेकिन चतुर्थ पड़ाव शिवपुर स्थित प्राचीन धर्मशालाओं में पेयजल और साफ-सफाई की बदहाल स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं की गईं तो पंचक्रोशी यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

शिवपुर रामलीला मैदान और राजा गोकुल चंद धर्मशाला के बाहर लगाए गए कई हैंडपंप खराब पड़े हैं, जबकि कुछ को उनके मूल स्थान से हटा दिया गया है। भीषण गर्मी के बीच पानी की समुचित व्यवस्था न होने से यात्रियों की दिक्कतें बढ़ सकती हैं। हालांकि सावन से पहले प्रशासन के पास व्यवस्थाएं सुधारने के लिए पर्याप्त समय है।
राजा गोकुल चंद धर्मशाला की देखरेख कर रहे फलाहारी बाबा आश्रम के महंत रामदास त्यागी ने बताया कि नगर निगम की ओर से धर्मशाला की चाबी उन्हें सौंपी गई है और यात्रियों के आने पर धर्मशाला खोल दी जाती है। उन्होंने कहा कि नियमित साफ-सफाई न होने के कारण परिसर में गंदगी फैल जाती है। धर्मशाला और रामलीला मैदान के बीच बने शौचालयों की स्थिति भी खराब है, जिससे श्रद्धालु उनका उपयोग नहीं कर पाते।
रामलीला समिति के अध्यक्ष संतोष मिश्रा ने बताया कि धर्मशाला में रामलीला से जुड़ी प्राचीन धरोहरें सुरक्षित रखी गई हैं, इसलिए मुख्य द्वार पर ताला लगा रहता है। पंचक्रोशी यात्रा के दौरान परिसर खोलकर साफ-सफाई कराई जाती है। उन्होंने कहा कि यहां दो हैंडपंप और समरसेबल की व्यवस्था है तथा पानी की टंकियों के माध्यम से जलापूर्ति की जाती है।
वहीं हनुमान धर्मशाला सुधार समिति के मंत्री राजनाथ यादव ने बताया कि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए स्नानागार, हाल और कमरे उपलब्ध कराए जाते हैं, ताकि यात्रियों को ठहरने में परेशानी न हो।
इधर, पंच पांडेश्वर मंदिर के आसपास बढ़ते अतिक्रमण को लेकर भी श्रद्धालुओं में नाराजगी है। स्थानीय श्रद्धालु पृथ्वी नाथ शर्मा ने बताया कि मंदिर के बाहरी हिस्से में अवैध दुकानों के कारण मुख्य प्रवेश और निकास मार्ग संकरा हो गया है। बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को करीब तीन फीट चौड़े रास्ते से निकलने में कठिनाई होती है। श्रद्धालु सुनील कुमार मौर्य ने कहा कि कई बार बाहर से आने वाले यात्री मंदिर का रास्ता पूछते नजर आते हैं क्योंकि अतिक्रमण के कारण मंदिर स्पष्ट दिखाई नहीं देता।
उल्लेखनीय है कि कुछ वर्ष पूर्व मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने भी पंचक्रोशी यात्रा के दौरान पंच पांडेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना की थी। उस समय मंदिर के सुंदरीकरण के लिए बजट स्वीकृत होने की चर्चा हुई थी, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि अब तक जमीनी स्तर पर कोई बड़ा कार्य नहीं हुआ।
श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि पंचकोसी परिक्रमा और सावन मेले से पहले पेयजल, साफ-सफाई और अतिक्रमण की समस्याओं का स्थायी समाधान कराया जाए, ताकि यात्रियों को सुविधाजनक और सुरक्षित वातावरण मिल सके।

