मंदिरों में पारदर्शिता बढ़ाने की मांग
वाराणसी (जनवार्ता)। अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चंदा चोरी के प्रकरण को लेकर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष एवं काशी विद्वत कर्मकांड परिषद के अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने देश के प्रमुख मंदिरों की व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि चोरी गई धनराशि की शीघ्र बरामदगी सुनिश्चित की जानी चाहिए और मंदिरों में दान व चढ़ावे के प्रबंधन को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाना चाहिए।

आचार्य द्विवेदी ने कहा कि श्रीराम मंदिर, श्रीकाशी विश्वनाथ, केदारनाथ, महाकाल और सिद्धिविनायक जैसे प्रमुख मंदिरों में प्राप्त नकद दान, आभूषण और अन्य बहुमूल्य चढ़ावे का पूरा विवरण नियमित रूप से वेबसाइट पर सार्वजनिक किया जाए, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास और अधिक मजबूत हो। उनका कहना था कि मंदिरों का संचालन धार्मिक परंपराओं और शास्त्रों के गहन जानकार विद्वानों के हाथ में होना चाहिए। उन्होंने नौकरशाहों को मंदिरों का सीईओ या न्यास सदस्य बनाए जाने का विरोध करते हुए कहा कि यह जिम्मेदारी योग्य एवं सक्रिय विद्वानों को दी जानी चाहिए।
उन्होंने मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि केवल औपचारिक सदस्यता देने के बजाय ऐसे लोगों को जिम्मेदारी सौंपी जानी चाहिए, जो मंदिर के विकास और व्यवस्थाओं में सक्रिय योगदान दे सकें। श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित स्वर्ण, रजत और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं के संरक्षण के लिए संग्रहालय की स्थापना का सुझाव देते हुए उन्होंने कहा कि इन धरोहरों को गलाने की परंपरा समाप्त होनी चाहिए और इन्हें सुरक्षित संरक्षित रखा जाना चाहिए।
आचार्य द्विवेदी ने कहा कि नकद चढ़ावे और प्रसाद वितरण की व्यवस्था भी पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। साथ ही मंदिर कर्मचारियों और सेवादारों की नियुक्ति अनुबंध के आधार पर की जाए तथा उनके कार्यों की वर्ष में कम से कम एक बार समीक्षा अनिवार्य रूप से की जाए। उन्होंने सेवादारों के लिए पारंपरिक वेशभूषा, जैसे धोती-कुर्ता, अनिवार्य किए जाने की भी वकालत की।

