जवाहर जायसवाल और विजय जायसवाल को एमपी-एमएलए कोर्ट ने किया तलब
वाराणसी (जनवार्ता)। कैंट थाने में वर्ष 2011 में दर्ज मुकदमे में पूर्व सांसद जवाहर जायसवाल और विजय जायसवाल की मुश्किलें बढ़ गई हैं। एमपी-एमएलए न्यायालय ने दोनों अभियुक्तों को आरोप तय किए जाने की कार्रवाई के लिए 21 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होने का आदेश दिया है।

मामला कैंट थाने में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 547/2011 से जुड़ा है। वादी माता प्रसाद मिश्रा की ओर से दर्ज मुकदमे में जवाहर जायसवाल समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ धारा 147, 323, 374, 504, 506, 120बी आईपीसी तथा न्यूनतम मजदूरी अधिनियम की धारा 3/4 के तहत पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था।
मामले में सभी आरोपियों की ओर से उन्मोचन प्रार्थना पत्र दाखिल किए गए थे, जिन्हें न्यायालय ने खारिज कर दिया था। इसके बाद आरोप तय करने की कार्रवाई होनी थी। अवर न्यायालय में जवाहर जायसवाल और विजय जायसवाल के खिलाफ केवल धारा 120बी आईपीसी तथा न्यूनतम मजदूरी अधिनियम की धारा 3/4 के तहत आरोप तय किए गए थे।
वादी माता प्रसाद मिश्रा ने इस आदेश को सत्र न्यायालय में आपराधिक निगरानी के माध्यम से चुनौती दी थी। सत्र न्यायालय ने वादी के पक्ष में फैसला सुनाया। इसके बाद एमपी-एमएलए न्यायालय ने जवाहर जायसवाल और विजय जायसवाल को 4 अगस्त और 18 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर आरोप तय कराने का निर्देश दिया था, लेकिन दोनों निर्धारित तारीखों पर न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए।
दोनों के लगातार अनुपस्थित रहने पर न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए अब उन्हें 21 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होकर आरोप तय कराने की कार्रवाई में शामिल होने का आदेश दिया है।

