बीएचयू के परीक्षा प्रश्न पर गरमाई सियासत, अजय राय ने जताई आपत्ति

बीएचयू के परीक्षा प्रश्न पर गरमाई सियासत, अजय राय ने जताई आपत्ति

वाराणसी (जनवार्ता)। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में एमए इतिहास की परीक्षा में “ब्राह्मणवादी पितृसत्ता” शब्द के उपयोग को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस मुद्दे पर बुधवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Ajay Rai ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए शिक्षा संस्थानों को नफरत और विभाजन की राजनीति से दूर रखने की बात कही।

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उन्होंने कहा कि हर जाति का सम्मान और सामाजिक समरसता भारतीय समाज की पहचान है। शिक्षा संस्थानों का उद्देश्य समाज में ज्ञान, संवेदनशीलता और एकता को बढ़ावा देना होना चाहिए, न कि किसी जाति, वर्ग या समुदाय के प्रति दुर्भावना पैदा करना। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान समय में शिक्षण संस्थानों में ऐसी विचारधाराएं थोपी जा रही हैं, जो समाज में वैचारिक टकराव और जातीय विभाजन को बढ़ावा देती हैं।

अजय राय ने कहा कि भारतीय सनातन परंपरा में ब्राह्मण समाज सदैव ज्ञान, शिक्षा, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक रहा है। वेद, उपनिषद, संस्कृत साहित्य और भारतीय दर्शन को आगे बढ़ाने में ब्राह्मण समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। किसी भी जाति को अपमानित करने या संदेह के घेरे में खड़ा करने की मानसिकता भारतीय संस्कृति और संविधान के विरुद्ध है।

उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और भर्ती परीक्षाओं में ऐसे विषय शामिल किए जा रहे हैं, जो समाज में जातीय तनाव और विरोधाभास पैदा करते हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश दरोगा भर्ती परीक्षा में ब्राह्मण समाज को “अवसरवादी” बताए जाने वाले प्रश्न तथा “घूसखोर पंडित” फिल्म विवाद का भी उल्लेख किया।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि शिक्षा संस्थानों को लोकतांत्रिक बहस, संविधान, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय एकता का केंद्र होना चाहिए, न कि राजनीतिक प्रयोगशाला। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से विवादित प्रश्न को तत्काल वापस लेने और भविष्य में शिक्षा संस्थानों का उपयोग किसी राजनीतिक या वैचारिक एजेंडे के लिए न होने देने की मांग की।

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Shiv murti