काशी में एक मंच पर जुटे ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधि, वैश्विक संस्कृति और सहयोग पर मंथन
वाराणसी (जनवार्ता)। विश्व की लगभग 49.5 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधि इन दिनों काशी में एक मंच पर जुटे हैं। भारत की अध्यक्षता में आयोजित ब्रिक्स सांस्कृतिक कार्य समूह (कल्चरल वर्किंग ग्रुप-सीडब्ल्यूजी) की महत्वपूर्ण बैठक गुरुवार को शहर के एक होटल में शुरू हुई, जिसमें सदस्य देशों के प्रतिनिधि संस्कृति, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), जलवायु परिवर्तन तथा चोरी हुई सांस्कृतिक धरोहरों की वापसी जैसे विषयों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं।

ब्रिक्स वर्तमान में विश्व की 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जो वैश्विक आबादी के लगभग 49.5 प्रतिशत, विश्व जीडीपी के करीब 40 प्रतिशत तथा वैश्विक व्यापार के लगभग 26 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया समेत दुनिया के विभिन्न हिस्सों में तनाव और संघर्ष की स्थिति बनी हुई है, काशी में आयोजित यह बैठक वैश्विक सांस्कृतिक संवाद और सहयोग के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बैठक में ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), इंडोनेशिया और भारत सहित ब्रिक्स देशों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। रूस, इथियोपिया और मिस्र के प्रतिनिधि वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल हुए, जबकि अधिकांश प्रतिनिधि बुधवार को ही वाराणसी पहुंच गए थे।
बैठक के दौरान सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने, नई तकनीकों के उपयोग, जलवायु परिवर्तन से जुड़े सांस्कृतिक प्रभावों तथा अवैध रूप से विदेश पहुंचाई गई सांस्कृतिक धरोहरों की वापसी के लिए साझा रणनीति तैयार करने पर चर्चा हो रही है।
गौरतलब है कि ब्रिक्स की शुरुआत वर्ष 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में आयोजित पहले शिखर सम्मेलन से हुई थी। वर्ष 2010 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद समूह का विस्तार हुआ। बाद में 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, यूएई और इंडोनेशिया जैसे देशों के जुड़ने से इसका वैश्विक प्रभाव और बढ़ा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि काशी में आयोजित यह बैठक सांस्कृतिक सहयोग को नई दिशा देने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर संवाद, साझेदारी और बहुपक्षीय सहयोग का मजबूत संदेश भी देगी।

