शिंजो आबे और मोदी की अटूट दोस्ती का जीवंत प्रतीक बना रुद्राक्ष

शिंजो आबे और मोदी की अटूट दोस्ती का जीवंत प्रतीक बना रुद्राक्ष

आकिए आबे और सीएम योगी ने किया ‘आबे मेमोरियल कॉरिडोर’ का लोकार्पण, भावुक होकर बोलीं- जीवित होते तो आज काशी जरूर आते

वाराणसी (जनवार्ता)। काशी में बुधवार को भारत-जापान की मैत्री और स्वर्गीय जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे की स्मृतियों को समर्पित एक नया अध्याय जुड़ गया। सिगरा स्थित रुद्राक्ष अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं सम्मेलन केंद्र में निर्मित ‘आबे मेमोरियल कॉरिडोर’ का लोकार्पण जापान के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय शिंजो आबे की पत्नी आकिए आबे और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संयुक्त रूप से किया।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत हुए कार्यक्रम में भारत-जापान संबंधों की गहराई और दोनों देशों के सांस्कृतिक जुड़ाव को रेखांकित किया गया। रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में बनाए गए स्मृति गलियारे में दिसंबर 2015 में शिंजो आबे की काशी यात्रा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनके आत्मीय क्षणों की दुर्लभ तस्वीरें प्रदर्शित की गई हैं।

पति की स्मृतियों को याद कर भावुक हुईं आकिए आबे

समारोह में आकिए आबे ने कहा कि वर्ष 2015 में काशी यात्रा के दौरान शिंजो आबे ने मां गंगा को बेहद श्रद्धा और ध्यान से देखा था। उन्होंने कहा कि लंबे समय से उनकी इच्छा थी कि वह स्वयं काशी आएं और यहां के पवित्र स्थलों के दर्शन करें। आबे मेमोरियल कॉरिडोर के उद्घाटन के साथ उनकी यह इच्छा पूरी हुई।

स्वर्गीय शिंजो आबे को याद करते हुए आकिए आबे भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि यदि आज उनके पति जीवित होते तो इस सुंदर स्मृति गलियारे को देखकर बेहद प्रसन्न होते और स्वयं काशी आने की इच्छा जताते।

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उन्होंने कहा कि काशी और जापान के क्योटो दोनों ही प्राचीन सांस्कृतिक नगर हैं। वर्ष 2014 में काशी-क्योटो पार्टनर सिटी समझौते के बाद दोनों शहरों के संबंध और मजबूत हुए। इसी क्रम में शिंजो आबे की भारत यात्रा के दौरान काशी में आधुनिक कन्वेंशन सेंटर बनाने पर सहमति बनी थी।

आकिए आबे ने रुद्राक्ष केंद्र के आध्यात्मिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रखा था। केंद्र की बाहरी दीवारों पर 108 रुद्राक्ष लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि 108 का आध्यात्मिक महत्व भारत के साथ-साथ जापान में भी है।

जापानी सिटी से सेमीकंडक्टर तक बढ़ रही साझेदारी : योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत-जापान की मित्रता अब केवल सांस्कृतिक संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीक, निवेश और औद्योगिक विकास के नए क्षेत्रों में भी मजबूत हो रही है। उन्होंने कहा कि भारत में करीब 1400 जापानी कंपनियां काम कर रही हैं और दोनों देश सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ग्रीन हाइड्रोजन और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश में नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास 500 एकड़ में ‘जापानी सिटी’ विकसित की जा रही है। जापानी निवेश को बढ़ावा देने के लिए ‘इन्वेस्ट यूपी’ में यामानाशी डेस्क भी स्थापित की गई है।

उन्होंने कहा कि जापान के पास उच्च तकनीक और अनुभव है, जबकि भारत के पास प्रतिभाशाली युवा शक्ति और विशाल बाजार है। दोनों की साझेदारी आने वाले समय में नए इतिहास का निर्माण करेगी।

तुलसीदास की चौपाई से समझाया सच्ची मित्रता का अर्थ

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मुख्यमंत्री ने जापानी भाषा में जापानी प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए भारत-जापान संबंधों को विश्वास पर आधारित मित्रता बताया। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास की चौपाई “निज दुख गिरि सम रज करि जाना, मित्रक दुख रज मेरु समाना” का उल्लेख करते हुए कहा कि सच्चा मित्र वही है जो अपने बड़े दुख को छोटा और मित्र के छोटे दुख को भी बड़ा मानकर उसकी सहायता करे।

योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिंजो आबे की मित्रता पद अथवा स्वार्थ पर आधारित नहीं थी, बल्कि गहरे विश्वास पर टिकी थी। उन्होंने 2014 के काशी-क्योटो समझौते, 2015 में शिंजो आबे की काशी यात्रा, 2017 में बुलेट ट्रेन परियोजना और 2018 में यामानाशी में मोदी को आबे द्वारा अपने निजी आवास पर आमंत्रित किए जाने को दोनों देशों की मित्रता के महत्वपूर्ण पड़ाव बताया।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 में भारत-जापान राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होंगे और ‘आबे मेमोरियल कॉरिडोर’ उस ऐतिहासिक अवसर की दिशा में एक महत्वपूर्ण सौगात है।

कार्यक्रम में राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार रवींद्र जायसवाल, महापौर अशोक कुमार तिवारी, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्य, कैंट विधायक सौरभ श्रीवास्तव सहित जापान का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल, काशी के गणमान्य नागरिक और स्कूली बच्चे मौजूद रहे। संचालन अभिनव चतुर्वेदी ने किया।

Shiv murti

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