पत्रकारिता के सच्चे प्रहरी मनोकामना सिंह की मनाई गई तृतीय पुण्यतिथि

पत्रकारिता के सच्चे प्रहरी मनोकामना सिंह की मनाई गई तृतीय पुण्यतिथि

सम्मान को ही बड़ा पुरस्कार मानते थे मनोकामना सिंह : डॉ राजकुमार सिंह

वाराणसी (जनवार्ता)। जनवार्ता हिंदी दैनिक के वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय मनोकामना सिंह (बाबू साहब) की तृतीय पुण्यतिथि मंगलवार को उनके शिवपुर स्थित आवास पर अत्यंत भावपूर्ण वातावरण में मनाई गई। इस अवसर पर उनके व्यक्तित्व, कृतित्व, सादगी और पत्रकारिता के प्रति निष्ठा को याद करते हुए श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए।

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कार्यक्रम में जनवार्ता परिवार के संपादक डॉ. राज कुमार सिंह, वरिष्ठ पत्रकार अंजनी कुमार राय, सी.एल. दीक्षित, सेवानिवृत्त क्षेत्राधिकारी राम इकबाल दुबे, अरुण कुमार सिंह, भानु प्रताप द्विवेदी, सुमित कुमार चौहान, अंजली मिश्रा, अजय कुमार श्रीवास्तव, अजय सिंह गुड्डू, चंद्र भूषण मिश्रा, विशाल सिंह, इंदु राय, सी.बी. सिंह, सुरेंद्र यादव सहित कई गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया और बाबू साहब को श्रद्धांजलि दी।

डॉ. राज कुमार सिंह ने कहा, “बाबू साहब ने जीवन भर अपनी लेखनी से समाज सेवा की। वे कभी धन के पीछे नहीं भागे, बल्कि सम्मान को ही सबसे बड़ा पुरस्कार मानते थे। उनकी हस्तलिपि लाखों में एक थी और वे पत्रकारिता की लगभग सभी विधाओं में निपुण थे, खासकर क्राइम पत्रकारिता में उनकी ख्याति पूरे देश में थी। उन्होंने पत्रकारिता को मिशन की तरह अपनाया था। उनके निधन से जो रिक्तता आई, वह आज भी नहीं भरी है।”

अपने पिता को याद करते हुए अरुण कुमार सिंह भावुक हो गए और बोले, “मैं अपने पिताजी को द्रोणाचार्य और खुद को उनका एकलव्य मानता हूँ। वे सिद्धांतवादी पत्रकार थे। उन्होंने मुझे पत्रकारिता छोड़ने की सलाह दी थी, क्योंकि आजकल इसमें निष्पक्षता और सिद्धांत कम बचे हैं। फिर भी मैं छिपकर उनकी लेखनी पढ़ता और सीखता रहा। मृत्यु से पहले उन्होंने कई मामलों में मेरी लेखनी से प्रभावित होकर कहा था कि ‘अरुण मुझसे भी आगे निकल गया है’। उनका यह आशीर्वाद आज भी मुझे बल देता है। मैं उनके आदर्शों पर चलने का प्रयास करता हूँ।”

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दूरदर्शी विचार समाचार पत्र के संपादक भानु प्रताप द्विवेदी ने कहा, “स्व. मनोकामना सिंह केवल पत्रकार नहीं, बल्कि पत्रकारिता के मूल्यों के सच्चे प्रहरी थे। उनकी निर्भीकता और ईमानदारी आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है। पत्रकारिता पेशा नहीं, समाज के प्रति जिम्मेदारी है। उनके आदर्शों को आगे बढ़ाना ही उनकी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”

सुमित कुमार चौहान (नगर संवाददाता, जनवार्ता) ने कहा, “हम बाऊजी को कभी नहीं भूल सकते। उन्होंने न जाने कितने लोगों को लिखना-पढ़ना सिखाया और पत्रकार बनाया। मैंने भी उनसे बहुत कुछ सीखा, जो जीवन भर याद रहेगा। माता-पिता के बाद भी उनका आशीर्वाद बच्चों पर बना रहता है।”

समारोह में सभी उपस्थितजनों ने एक स्वर में कहा कि स्व. मनोकामना सिंह ने पत्रकारिता को समाज सेवा का माध्यम बनाया। अपनी सादगी, निष्ठा और निर्भीक लेखनी से उन्होंने अमिट छाप छोड़ी। उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए सभी ने उनके आदर्शों को जीवित रखने और आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

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