आईआईवीआर में सब्जी फसलों में ग्राफ्टिंग तकनीक का प्रशिक्षण शुरू
10 राज्यों के 30 युवा कृषि उद्यमी ले रहे पांच दिवसीय हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण
वाराणसी (जनवार्ता)। भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर), वाराणसी में सब्जी फसलों में नर्सरी प्रबंधन एवं ग्राफ्टिंग तकनीक विषय पर पांच दिवसीय हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। इसमें 10 राज्यों से आए 30 युवा किसान एवं कृषि उद्यमी भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण का उद्देश्य प्रतिभागियों को वैज्ञानिक नर्सरी प्रबंधन और ग्राफ्टिंग तकनीक का सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक ज्ञान देकर सब्जी उत्पादन की उत्पादकता, गुणवत्ता और लाभप्रदता बढ़ाने के लिए सक्षम बनाना है।


कार्यक्रम के संयोजक डॉ. अनंत बहादुर ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए ग्राफ्टिंग तकनीक के महत्व और सब्जी उत्पादन में इसकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ग्राफ्टेड पौधों के उपयोग से मृदा जनित रोगों के प्रभाव को कम करने के साथ प्रतिकूल परिस्थितियों में भी पौधों की बेहतर वृद्धि और उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
कृषि प्रसार वैज्ञानिक डॉ. नीरज सिंह ने ग्राफ्टिंग तकनीक को किसानों के खेतों तक व्यापक स्तर पर पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तकनीकों का प्रभावी प्रसार तभी संभव है, जब कृषि उद्यमी स्वयं इन्हें अपनाकर लाभ का अनुभव करें और दूसरे किसानों तक इसकी जानकारी पहुंचाएं।
संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने प्रशिक्षणार्थियों को ग्राफ्टिंग तकनीक के क्यों, कैसे और लाभ से संबंधित विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने ग्राफ्टेड पौधों के चयन, उचित रोपण, देखभाल और वैज्ञानिक प्रबंधन की जानकारी देते हुए बताया कि इस तकनीक से पौधों में मृदा जनित रोगों के प्रति सहनशीलता बढ़ाने, प्रतिकूल परिस्थितियों में बेहतर स्थापना और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन में मदद मिलती है।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को स्वस्थ एवं गुणवत्तापूर्ण पौध तैयार करने, बीज चयन एवं उपचार, वैज्ञानिक नर्सरी तैयार करने, बुवाई, सिंचाई, पोषण प्रबंधन, रोग एवं कीट नियंत्रण तथा पौधों की देखभाल की जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही बैंगन और टमाटर समेत प्रमुख सब्जी फसलों में ग्राफ्टिंग का प्रत्यक्ष प्रदर्शन और हैंड्स-ऑन अभ्यास कराया जाएगा।
प्रतिभागियों को रूटस्टॉक और सायन के चयन, ग्राफ्टिंग की वैज्ञानिक विधि, ग्राफ्ट यूनियन तैयार करने, ग्राफ्टेड पौधों की देखभाल तथा खेत में रोपण एवं प्रबंधन की तकनीक भी सिखाई जा रही है। वैज्ञानिकों के अनुसार ग्राफ्टिंग से तैयार पौधे मृदा जनित रोगों और विभिन्न प्रतिकूल परिस्थितियों के प्रति अधिक सहनशील होते हैं, जिससे फसल की उत्पादकता एवं गुणवत्ता में सुधार के साथ किसानों की आय और लाभप्रदता बढ़ाने में सहायता मिल सकती है।
कार्यक्रम में डॉ. ए.एन. सिंह और डॉ. डी.पी. सिंह उपस्थित रहे। संचालन डॉ. आत्मानंद त्रिपाठी ने किया। प्रशिक्षण में शामिल किसानों ने ग्राफ्टिंग एवं नर्सरी प्रबंधन तकनीक में विशेष रुचि दिखाई और इसे व्यावसायिक सब्जी उत्पादन के लिए उपयोगी तकनीक बताया।

