गर्मी बढ़ी तो फेल हुई बिजली व्यवस्था, 600 नए ट्रांसफार्मर भी नहीं रोक पाए कटौती

गर्मी बढ़ी तो फेल हुई बिजली व्यवस्था, 600 नए ट्रांसफार्मर भी नहीं रोक पाए कटौती

वाराणसी (जनवार्ता)। भीषण गर्मी की शुरुआत के साथ ही वाराणसी की बिजली व्यवस्था चरमराने लगी है। बिजली विभाग ने गर्मी से पहले बड़े स्तर पर तैयारियों का दावा किया था। विभाग की ओर से करीब 600 नए ट्रांसफार्मर लगाए गए और 670 पुराने ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई गई, ताकि बढ़ते लोड के बीच निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। लेकिन तापमान बढ़ते ही विभागीय दावों की पोल खुलने लगी है।
शहर के कई इलाकों में घंटों बिजली कटौती, लो-वोल्टेज और बार-बार ट्रिपिंग की समस्या से लोग परेशान हैं। लंका, भेलूपुर, शिवपुर, पांडेयपुर, चौकाघाट, महमूरगंज, सुंदरपुर, भिखारीपुर, चितईपुर, मंडुवाडीह, सिगरा, रथयात्रा और कैंट समेत कई क्षेत्रों में सोमवार रात से मंगलवार तक बिजली आपूर्ति बाधित रही। कहीं ट्रांसफार्मर ओवरलोड होकर फुंक रहे हैं तो कहीं फीडर ट्रिप होने से सप्लाई ठप हो रही है।
उमसभरी गर्मी में बिजली कटौती ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। घरों में पंखे, कूलर और एसी बेअसर साबित हो रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को झेलनी पड़ रही है। उपभोक्ताओं का कहना है कि शिकायत के बाद भी समय पर समाधान नहीं मिल रहा।
जिले में उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए कुल 28,590 ट्रांसफार्मर लगाए गए हैं। इसके बावजूद व्यवस्था सुचारु नहीं हो पा रही। विभागीय अधिकारी रिकॉर्ड दुरुस्त रखने में जुटे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर उपभोक्ताओं को राहत नहीं मिल रही।
बिजली विभाग ने अप्रैल में दावा किया था कि गर्मी को देखते हुए व्यापक तैयारियां की गई हैं। जर्जर तार बदले गए, नए ट्रांसफार्मर लगाए गए और कई उपकेंद्रों की क्षमता बढ़ाई गई। साथ ही पेट्रोलिंग कर संभावित खराबियों को पहले ही दुरुस्त करने की बात कही गई थी। लेकिन मई में तापमान बढ़ते ही बिजली व्यवस्था जवाब देने लगी।
ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति और खराब बताई जा रही है। सेवापुरी, चोलापुर, रोहनिया, हरहुआ, चिरईगांव, चौबेपुर और मुनारी क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति लगातार प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि ट्रांसफार्मर खराब होने के बाद कई-कई दिन तक बिजली बहाल नहीं होती।
बिजली विशेषज्ञों का कहना है कि केवल ट्रांसफार्मरों की संख्या बढ़ाने से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। जिले के कई हिस्सों में दशकों पुराने तार और पोल अब भी इस्तेमाल हो रहे हैं, जो बढ़ते लोड को झेलने में सक्षम नहीं हैं। हल्का दबाव बढ़ते ही फाल्ट और ट्रिपिंग शुरू हो जाती है।
विभाग का दावा है कि फाल्ट की सूचना मिलते ही टीम मौके पर भेजी जा रही है और ट्रांसफार्मर जलने पर रिजर्व ट्रॉली ट्रांसफार्मर तत्काल लगाए जा रहे हैं।
ऊर्जा एवं नगर विकास मंत्री A. K. Sharma ने हाल ही में समीक्षा बैठक कर अधिकारियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। उन्होंने ट्रांसफार्मर जलने पर संबंधित अभियंताओं की जवाबदेही तय करने की भी बात कही थी। इसके बावजूद हालात में खास सुधार नहीं दिख रहा।
मुख्य अभियंता राकेश कुमार पांडेय ने कहा कि भीषण गर्मी में बिजली की मांग बढ़ गई है, जिससे ट्रांसफार्मर और केबल पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। विभाग लगातार निगरानी कर रहा है और शिकायत मिलते ही खराबी दूर की जा रही है।
डाफी उपकेंद्र से जुड़े सुसुवाही बाजार में मंगलवार दोपहर तीन बजे से शाम छह बजे तक बिजली आती-जाती रही, जिससे दुकानदारों और स्थानीय लोगों को परेशानी उठानी पड़ी। वहीं करसड़ा उपकेंद्र से जुड़े रमना फीडर पर सोमवार रात से मंगलवार तक करीब 20 बार बिजली कटौती होने की शिकायत सामने आई।
सारनाथ निवासी सरोज सिंह का कहना है कि गर्मी शुरू होने से पहले जर्जर तार और खराब केबल बदल दिए जाते तो यह स्थिति नहीं बनती। टकटकपुर निवासी ओपी सिंह ने कहा कि रात में बिजली कटौती से लोगों की नींद तक पूरी नहीं हो पा रही है और दिन में घरों में रहना मुश्किल हो गया है।

rajeshswari
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Shiv murti

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