सराफा दुकानों में अब चेहरा ढककर नहीं खरीद सकेंगे गहने
वाराणसी (जनवार्ता) । सराफा कारोबारियों ने बढ़ती चोरी और लूट की घटनाओं को रोकने के लिए एक सख्त और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब शहर की सभी फुटकर सराफा दुकानों और शोरूम में हिजाब, बुर्का, नकाब, घूंघट, हेलमेट या मास्क पहनकर आने वाले ग्राहकों को गहने नहीं बेचे जाएंगे। खरीदारी के दौरान ग्राहकों को अपना चेहरा स्पष्ट रूप से दिखाना अनिवार्य होगा।

उत्तर प्रदेश ज्वेलर्स एसोसिएशन की वाराणसी इकाई के जिलाध्यक्ष कमल कुमार सिंह ने बताया कि यह फैसला पूरी तरह से सुरक्षा के उद्देश्य से लिया गया है। उन्होंने कहा कि हाल के महीनों में कई घटनाओं में अपराधी चेहरा ढककर दुकानों में प्रवेश करते हैं, जिसके कारण उनकी पहचान करना बेहद मुश्किल हो जाता है। सोने-चांदी के लगातार बढ़ते दामों के चलते सराफा दुकानें अपराधियों का मुख्य निशाना बन रही हैं। उनका कहना है कि इस नियम का मकसद दुकानदारों और ग्राहकों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
दुकानों के बाहर अब बड़े-बड़े पोस्टर लगाए जा रहे हैं, जिनमें साफ-साफ लिखा है कि मास्क, बुर्का, हेलमेट या घूंघट पहनकर प्रवेश निषेध है। यदि कोई ग्राहक हिजाब या बुर्का पहनकर आता है तो प्रवेश के समय उसे चेहरा खोलना होगा ताकि दुकानदार सुरक्षित महसूस कर सके।
व्यापारियों ने स्पष्ट किया है कि यह नियम किसी धर्म, समुदाय या वर्ग के खिलाफ नहीं है। यह केवल और केवल सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। कमल कुमार सिंह ने जोर देकर कहा कि यह पाबंदी सभी पर एकसमान लागू होगी और थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती है।
सराफा मंडल के अनुसार वाराणसी जिले में थोक मंडी के अलावा शहरी और ग्रामीण इलाकों में करीब ढाई हजार से अधिक फुटकर सराफा कारोबारी सक्रिय हैं। सभी कारोबारियों ने इस निर्णय का पूर्ण समर्थन किया है। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए जिले की हर थोक और फुटकर दुकान में सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।
यह कदम वाराणसी तक सीमित नहीं है। झांसी, इटावा, लखनऊ सहित उत्तर प्रदेश के कई जिलों में पहले से ही ऐसा नियम लागू हो चुका है। बिहार देश का पहला राज्य बन गया जहां राज्य स्तर पर यह पाबंदी लागू की गई है। बिहार में 8 जनवरी से यह नियम प्रभावी हो गया है और इसके बाद पूरे देश में इसकी चर्चा तेज हो गई है।

