प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में रामलीला पर संकट
मुस्लिम बाहुल्य कोटवा गांव में 60 वर्ष पुरानी परंपरा पर मंडराया खतरा

वाराणसी (जनवार्ता) । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के लोहता थाना क्षेत्र स्थित मुस्लिम बाहुल्य कोटवा गांव में करीब 60 वर्षों से आयोजित हो रही ऐतिहासिक रामलीला और विजयादशमी महोत्सव की तैयारियों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। रामलीला समिति ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक उदासीनता का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी है कि यदि समय रहते बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो इस वर्ष आयोजन प्रभावित हो सकता है।

रामलीला समिति के अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह ‘राजू’ ने बताया कि ग्राम कोटवा के रकबा संख्या 1033 स्थित ऐतिहासिक विजयादशमी रामलीला मैदान में वर्षों से क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का निर्वहन होता आ रहा है। यह आयोजन न केवल कोटवा बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों की आस्था का केंद्र है। इसके बावजूद मैदान तक पहुंचने वाले मुख्य मार्ग और अधूरे विकास कार्यों की ओर किसी का ध्यान नहीं है।
उन्होंने बताया कि बीडीओ के मार्गदर्शन और ग्राम सचिव की देखरेख में मैदान की बाउंड्रीवाल का निर्माण शुरू हुआ था। अधिकांश कार्य पूरा होने के बावजूद शेष हिस्सा लंबे समय से अधूरा पड़ा है। इससे मैदान की सुरक्षा और व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
समिति का आरोप है कि रामलीला मैदान तक पहुंचने के लिए केवल एक ही रास्ता उपलब्ध है, जिस पर गंदा पानी और नालियों का बहाव होने से आवागमन मुश्किल हो गया है। बरसात के दिनों में स्थिति और गंभीर हो जाती है। श्रद्धालुओं, महिलाओं और बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
समिति ने मांग की है कि मैदान तक जाने वाले मार्ग पर तत्काल मिट्टी डालकर ऊंचाई बढ़ाई जाए, सड़क का निर्माण कराया जाए तथा खुले नालों को सीवर लाइन से जोड़ा जाए। साथ ही अधूरी बाउंड्रीवाल का निर्माण भी शीघ्र पूरा कराया जाए।
रामलीला समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि रामनगर की विश्वविख्यात रामलीला के बाद कोटवा की रामलीला भी क्षेत्र में अपनी अलग ऐतिहासिक पहचान रखती है। हर वर्ष हजारों श्रद्धालु यहां आयोजित रामलीला और विजयादशमी कार्यक्रम में शामिल होते हैं। ऐसे में आयोजन स्थल की बदहाल स्थिति स्थानीय लोगों में नाराजगी का कारण बन रही है।
समिति के पूर्व अध्यक्ष एवं सामाजिक कार्यकर्ता अजय कुमार सिंह ‘गुड्डू’, प्रवीण सिंह ‘मोनू’, गौरव सिंह समेत अन्य लोगों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक विकास कार्य पूरे नहीं किए गए तो क्षेत्र की ऐतिहासिक धार्मिक परंपरा प्रभावित हो सकती है, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की होगी।

