84 घाटों के गंगाजल से भगवान जगन्नाथ का महाअभिषेक
14 दिनों तक नहीं होंगे दर्शन
वाराणसी। ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा पर सोमवार को अस्सी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में आस्था का भव्य उत्सव देखने को मिला। परंपरा के अनुसार भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा का काशी के 84 घाटों से लाए गए गंगाजल से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महाअभिषेक किया गया। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही।

महिलाएं अस्सी घाट से डमरू दल के साथ कलश में गंगाजल लेकर शोभायात्रा के रूप में मंदिर पहुंचीं और भगवान का जलाभिषेक किया। मंगला आरती के बाद सुबह करीब पांच बजे भगवान को पांच प्रकार के मेवों का भोग अर्पित किया गया। श्रद्धालुओं ने गंगाजल, तुलसी की माला और फलों के साथ पूजन-अर्चन कर सुख-समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर भगवान को विशेष गुलाबी वस्त्र धारण कराए गए और सिंहासन पर विराजमान कर भक्तों को दर्शन दिए गए।
धार्मिक मान्यता के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा पर महाअभिषेक के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा अस्वस्थ हो जाते हैं। इसके बाद तीनों देव विग्रह 14 दिनों के लिए एकांतवास में चले जाते हैं। इस अवधि में मंदिर में आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन बंद रहेंगे।
एकांतवास के दौरान भगवान की विशेष सेवा की जाएगी तथा उन्हें औषधीय गुणों से युक्त परवल के काढ़े का भोग लगाया जाएगा। मान्यता है कि इसी अवधि में भगवान स्वास्थ्य लाभ करते हैं। इसके बाद निर्धारित तिथि पर पुनः भक्तों को दर्शन का अवसर मिलेगा।

