हिंद महासागर में भारत का एक और मजबूत किला तैयार,चीन के स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स की निकल जाएगी हवा!

हिंद महासागर में भारत का एक और मजबूत किला तैयार,चीन के स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स की निकल जाएगी हवा!

नई दिल्ली। हिंद महासागर में सुरक्षा के लिहाज से भारत ने एक मजबूत किला तैयार कर लिया है। मॉरीशस के अगालेगा द्वीप पर नई एयरस्ट्रिप और जेटी का उद्घाटन गुरुवार को हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मॉरीशस के PM प्रविंद जुगनाथ ने संयुक्त रूप से सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की शुरुआत की। भारत और मॉरीशस की यह जुगलबंदी चीन को अखरने वाली है। मॉरीशस में नए एयरस्ट्रिप और जेटी की मौजूदगी को सुरक्षा विशेषज्ञ भारत के मिलिट्री अड्डे की तरह देख रहे हैं। इससे चीन की ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ वाली रणनीति को काटने में मदद मिलेगी। नई एयरस्ट्रिप पर भारत के टोही विमान उतर सकेंगे। जरूरत पड़ने पर नौसेना युद्धपोत भी भेज पाएगी। हिंद महासागर में चीन की गतिविधियां बढ़ रही हैं। उन्हें काउंटर करने की दिशा में अगालेगा के ये प्रोजेक्‍ट्स अहम भूमिका निभाएंगे। हाल ही में, चीन ने भारत के करीबी रहे मालदीव को अपने पाले में किया है।

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पिछले कुछ महीनों में चीन और मालदीव के रिश्ते बुरी तरह बिगड़ गए हैं। मालदीव की चीन से नजदीकी से इशारा मिला कि ड्रैगन फिर से ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ वाली पॉलिसी को जिंदा कर रहा है। मालदीव में चीन का ‘रिसर्च’ जहाज पहुंचा तो भारत की चिंताएं और बढ़ गईं।

बढ़ेगा समुद्र में भारत का दबदबा
भारत और मॉरीशस की दोस्ती काफी गहरी है। हजारों की संख्या में भारतीय मॉरीशस में रहते हैं। हाल ही में भारत ने मॉरीशस में यूनाइटेड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और RuPay कार्ड सेवाओं की शुरुआत की है। गुरुवार को अगालेगा द्वीप पर नई एयरस्ट्रिप और जेटी के अलावा छह संयुक्त विकास प्रोजेक्‍ट्स का भी उद्घाटन किया गया। इस एयरस्ट्रिप पर वायुसेना और नौसेना के विमानों की लंबी तैनाती संभव हो सकेगी। डेक्कन क्रॉनिकल की एक रिपोर्ट बताती है कि भारतीय नौसेना के युद्धपोत भी वहां ठहर पाएंगे। इस दौरान दोनों देशों की फोर्सेज साझा अभ्यास भी कर सकती हैं।

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क्या है चीन का ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ प्‍लान?
अमेरिकी नेवल एनालिस्‍ट रॉबर्ट कैप्लन ने कोई दो दशक पहले इस तरह की रणनीति को ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ कहा। ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ का मतलब चीनी सैन्य और व्यापारिक ठिकानों के जरिए भारत की घेराबंदी से है। पोर्ट सूडान से लेकर हॉर्न ऑफ अफ्रीका तक चीन का जाल फैला है। डिफेंस एक्‍सपर्ट इसे समुद्री चोक प्‍वॉइंट्स पर कब्‍जा करने की चीनी रणनीति की तरह देखते हैं।

चीन ने प्रभुत्व बढ़ाने के लिए बेल्‍ट एंड रोड (BRI) और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे जैसे प्रोजेक्ट भी शुरू किए। कंबोडिया में चीन के नौसैनिक अड्डे, श्रीलंका में हंबनटोटा और पाकिस्तान में ग्वादर के अलावा, जिबूती के बंदरगाह पर एक नौसैनिक स्टेशन के अलावा म्यांमार में क्यौकफ्यू बंदरगाह के जरिए चीन रणनीतिक दबाव बढ़ा रहा है।

समुद्र में केबलों का नेटवर्क बना रहा चीन
चीन ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ के भीतर केबलों का एक बड़ा नेटवर्क बना रहा है। यह पाकिस्तान में ग्वादर बंदरगाह और श्रीलंका में हंबनटोटा बंदरगाह सहित कई समुद्री चोक प्‍वॉइंट्स से होकर गुजरता है, चीन लंबे समय से इंडो-पैसिफिक पर नियंत्रण चाहता है। एक्सपर्ट्स को डर है कि इन केबलों का इस्तेमाल सर्विलांस के लिए किया जा सकता है।

अगस्त 2022 में जब चीन का सर्वे शिप श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह पहुंचा था, तब भारत के साथ-साथ अमेरिका भी नाराज हो उठा था। बीजिंग ने समुद्र में अपनी सर्विलांस क्षमताएं कई गुना बढ़ाई हैं। 2008 के बाद से हिंद महासागर में चीन का दखल बढ़ा है। पाइरेसी से निपटने का बहाना बनाकर चीन ने बार-बार अपनी नौसेना को हिंद महासागर और अदन की खाड़ी में उतारा।

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भारत ने अपने इलाके में नेवल सर्विलांस बढ़ाया है लेकिन आक्रामक चीन लगातार खतरा बना हुआ है।

Shiv murti

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