खेत बचाओ अभियान के तहत इनपुट डीलरों एवं सहकारी समितियों के सदस्यों को किया गया जागरूक
वाराणसी (जनवार्ता)। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) एवं कृषि मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के तहत गुरुवार को कलेक्ट्री फार्म, चांदपुर स्थित बहुउद्देश्यीय किसान कल्याण केंद्र में इनपुट डीलरों, सहकारी समितियों एवं पैक्स सदस्यों के लिए जागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर) के तत्वावधान में कृषि विभाग, वाराणसी के सहयोग से किया गया, जिसमें जनपद एवं आसपास के क्षेत्रों से आए 150 से अधिक कृषि उत्पाद वितरकों और सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।


कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने किसानों को रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और जैव उर्वरकों के अधिकाधिक उपयोग के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए जैविक एवं सूक्ष्मजीव आधारित तकनीकों का प्रयोग समय की आवश्यकता है।
कृषि मंत्रालय, भारत सरकार के प्रतिनिधि अखिलेश नंदन ने सरकार की कृषि हितैषी नीतियों एवं किसानों के लिए संचालित विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए कहा कि खेतों में रसायनों के उपयोग को कम करना सरकार की प्राथमिकता है, जिसमें कृषि इनपुट डीलरों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
प्रधान वैज्ञानिक डॉ. नीरज सिंह ने “खेत बचाओ अभियान” के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए किसानों तक अभियान की जानकारी पहुंचाने में इनपुट डीलरों और सहकारी संस्थाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। वहीं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. डी.पी. सिंह ने जैव उर्वरकों के उत्पादन, गुणवत्ता मानकों, लाइसेंस प्रक्रिया तथा सूक्ष्मजीव आधारित कंसोर्टिया तैयार करने की विधियों की विस्तृत जानकारी दी।
प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सुदर्शन मौर्य ने बीज अधिनियम एवं कीटनाशक कानून से संबंधित महत्वपूर्ण प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए गुणवत्तायुक्त कृषि आदानों के उपयोग पर जोर दिया। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मोहम्मद शाहिद ने मृदा नमूना संग्रहण की वैज्ञानिक पद्धति तथा संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम में उप कृषि निदेशक अमित जायसवाल ने उत्तर प्रदेश सरकार की विभिन्न किसान कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए प्रतिभागियों से इन योजनाओं का लाभ किसानों तक पहुंचाने का आह्वान किया। इस अवसर पर चयनित किसानों को दलहन एवं अन्य फसलों के बीज भी वितरित किए गए।
गोष्ठी के दौरान जैव उर्वरकों के उपयोग, संतुलित पोषण प्रबंधन और गुणवत्तायुक्त कृषि आदानों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया। प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों के साथ संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. नीरज सिंह ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

