अयोध्या में जलने वाला एक-एक दीप पूरे यूपी की समृद्धि का प्रतीक : योगी आदित्यनाथ
बिना भेदभाव योजनाओं का लाभ पहुंचना ही रामराज्य
पीलीभीत । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या में प्रज्ज्वलित होने वाला एक-एक दीप पूरे उत्तर प्रदेश की समृद्धि, विकास और खुशहाली का प्रतीक है। दीपोत्सव के दीप केवल भगवान श्रीराम के आगमन की स्मृति को जीवंत नहीं करते, बल्कि प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य का संदेश भी देते हैं। आस्था भारत की सबसे बड़ी ताकत है, जिसने विविधताओं से भरे देश को एकता के सूत्र में बांध रखा है।

मुख्यमंत्री मंगलवार को पीलीभीत के निरानपुर गांव में ब्रह्मलीन महंत योगी शांतिनाथ जी की पुण्य स्मृति में आयोजित श्रीराम कथा महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने शिव मंदिर में पूजा-अर्चना की, विभिन्न परियोजनाओं का लोकार्पण किया और व्यास पीठ पर विराजमान संत अंजनी शरण जी को वस्त्र एवं फल भेंटकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने श्रद्धापूर्वक रामकथा का श्रवण भी किया।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक भारत में भाषा, बोली, रहन-सहन और वेशभूषा की विविधता है, लेकिन इसके बावजूद देश एक भाव और एक विचार से जुड़ा हुआ है। इसके पीछे हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था की महत्वपूर्ण भूमिका है। हजारों वर्षों से रामकथा और रामलीला की परंपरा समाज को जोड़ने का काम कर रही है। गोस्वामी तुलसीदास ने गुलामी के दौर में रामलीला की परंपरा को आगे बढ़ाया, जो आज भी गांव-गांव में उत्साह के साथ निभाई जा रही है।
पांच सौ वर्षों के संघर्ष के बाद साकार हुआ राम मंदिर का संकल्प
मुख्यमंत्री ने कहा कि रामजन्मभूमि की मुक्ति के लिए पांच सौ वर्षों तक संघर्ष चलता रहा। अंततः पूरे देश की एकजुटता से अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण संभव हुआ। उन्होंने दो नवंबर 1990 की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय अयोध्या में रामभक्तों पर गोलियां चलाई गई थीं। रामभक्तों को अनेक प्रतिबंधों और अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ता था। आज वही अयोध्या आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होकर देश-दुनिया के श्रद्धालुओं का स्वागत कर रही है।
उन्होंने कहा कि आज प्रतिदिन एक लाख से अधिक श्रद्धालु रामलला के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। पर्व और त्योहारों पर यह संख्या पांच लाख से लेकर 50 लाख तक हो जाती है। अयोध्या में चारों दिशाओं से चार लेन की सड़कें, बेहतर रेल सुविधाएं और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की व्यवस्था है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले रामभक्तों पर लाठियां और गोलियां चलती थीं, आज उन पर पुष्पवर्षा होती है।
बिना भेदभाव योजनाओं का लाभ मिलना ही रामराज्य
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि रामराज्य की वास्तविक अवधारणा यही है कि शासन की योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचे। गरीबों को मुफ्त राशन, आयुष्मान भारत योजना के तहत पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा, नौजवानों को रोजगार, किसानों को सम्मान निधि और बेटियों व व्यापारियों को सुरक्षा मिलना सुशासन का आधार है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में लोगों को राशन, बिजली, अच्छी सड़क और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ता था। त्योहारों के दौरान उपद्रव और दंगों की स्थिति पैदा होती थी, लेकिन आज प्रदेश में कर्फ्यू और अराजकता का माहौल नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तुष्टीकरण की राजनीति से आतंकवाद, उग्रवाद और नक्सलवाद को बढ़ावा मिला, जबकि संतुष्टीकरण के भाव से बिना भेदभाव हर व्यक्ति, गांव, गरीब, किसान, युवा और महिला तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंच रहा है। यही भाव एक भारत-श्रेष्ठ भारत की आधारशिला है।
काशी से अयोध्या और विंध्यवासिनी धाम तक धार्मिक स्थलों का कायाकल्प
मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या के साथ काशी, मथुरा-वृंदावन और प्रदेश के अन्य धार्मिक स्थलों का भी विकास हो रहा है। काशी विश्वनाथ धाम में अब बड़ी संख्या में श्रद्धालु एक साथ दर्शन कर सकते हैं। मथुरा-वृंदावन में सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। मां विंध्यवासिनी धाम का कायाकल्प किया गया है। लखीमपुर खीरी के गोला गोकर्णनाथ में कॉरिडोर का निर्माण हो रहा है, जबकि बरेली अपनी नाथ नगरी की पहचान को फिर से स्थापित कर रही है।
उन्होंने कहा कि सकारात्मकता से श्रद्धा, आस्था और प्रकाश का संचार होता है। इसके विपरीत नकारात्मकता से अराजकता, विध्वंस, अव्यवस्था और अशांति पैदा होती है। रामकथा का उद्देश्य केवल श्रवण करना नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में उतारना है।
महर्षि वाल्मीकि ने दुनिया को दिया श्रीराम के आदर्शों का संदेश
मुख्यमंत्री ने महर्षि वाल्मीकि का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने आदि रामायण की रचना कर दुनिया को प्रभु श्रीराम के चरित्र और आदर्शों से परिचित कराया। रामायण आज दुनिया की अनेक भाषाओं में उपलब्ध है, लेकिन इसका मूल आधार महर्षि वाल्मीकि की रचना है। उनका कथन ‘रामो विग्रहवान धर्मः’ आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। श्रीराम का जीवन पुत्र, भाई, गुरु, पति और समाज के प्रति मर्यादित आचरण की शिक्षा देता है।
ब्रह्मलीन महंत योगी शांतिनाथ जी को श्रद्धांजलि देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वह सहज स्वभाव के फक्कड़ और निराले संत थे। उनका जीवन अपनी मस्ती में रहते हुए अच्छे कार्यों में सहयोग करने का उदाहरण था।
कार्यक्रम में शक्तिपीठ देवीपाटन के महंत मिथिलेश महाराज, हनुमानगढ़ी अयोध्या के महंत राजूदास, प्रदेश सरकार के मंत्री सरदार बलदेव सिंह औलख, मंत्री संजय गंगवार, विधान परिषद सदस्य डॉ. सुधीर गुप्ता, संजीव प्रताप सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष गोकुल प्रसाद मौर्य, विधायक विवेक वर्मा, बाबूराम पासवान, स्वामी प्रवक्तानंद, जिला पंचायत प्रशासक दलजीत कौर सहित बड़ी संख्या में संत-महात्मा और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

