2011 के महाभूकंप से जापान 5-6 मीटर खिसका, 15 साल बाद वैज्ञानिकों ने सुलझाया रहस्य
भूकंपीय तरंगें पृथ्वी के कोर से टकराकर लौटीं, पूरे देश में एकसाथ दर्ज हुई थी असामान्य हलचल
टोक्यो। वर्ष 2011 में जापान में आए विनाशकारी 9.0 तीव्रता के भूकंप ने न केवल भारी तबाही मचाई थी, बल्कि पूरे देश की भौगोलिक स्थिति भी बदल दी थी। हालिया वैज्ञानिक अध्ययन में खुलासा हुआ है कि इस भूकंप के बाद जापान का भूभाग पूर्व दिशा की ओर लगभग 5 से 6 मीटर तक खिसक गया था। इस घटना में करीब 20 हजार लोगों की जान गई थी।
शिकागो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार, भूकंप के दौरान फॉल्ट लाइन के पास स्थित विशाल चट्टानी खंड अचानक एक-दूसरे के ऊपर फिसल गए, जिससे अत्यंत शक्तिशाली भूकंपीय तरंगें उत्पन्न हुईं। ये तरंगें पृथ्वी के भीतर गहराई तक पहुंचकर उसके कोर से टकराईं और फिर सतह की ओर लौट आईं।
वैज्ञानिकों का कहना है कि लौटती हुई इन तरंगों ने जापान के नीचे मौजूद टेक्टोनिक प्लेटों की सीमाओं को दोबारा सक्रिय कर दिया, जिसके कारण पूरे देश में एकसाथ असामान्य भू-हलचल दर्ज की गई। यह गतिविधि सामान्य आफ्टरशॉक से अलग थी और कई वर्षों तक वैज्ञानिकों के लिए रहस्य बनी रही।
जापान के जियोनेट नेटवर्क, जिसमें 1,200 से अधिक जीपीएस स्टेशन शामिल हैं, ने भूकंप के लगभग 16 मिनट बाद पूरे देश में एक साथ हुए इस विस्थापन को रिकॉर्ड किया था। उस समय आसपास कोई दूसरा बड़ा भूकंप नहीं आया था, जिससे इस घटना की वजह समझना चुनौतीपूर्ण हो गया था।
शोधकर्ताओं का मानना है कि यह खोज भविष्य में भूकंप संभावित क्षेत्रों में जोखिम का अधिक सटीक आकलन करने में मददगार साबित होगी। साथ ही इससे यह समझने में भी सहायता मिलेगी कि पृथ्वी के कोर से परावर्तित भूकंपीय तरंगें किस प्रकार नए भूगर्भीय परिवर्तनों को जन्म दे सकती हैं।


