मीरजापुर में ड्रमंडगंज घाटी के रोड डिजाइन पर उठे सवाल, 11 मौतों के बाद एफआईआर की मांग तेज
मीरजापुर (जनवार्ता)। राष्ट्रीय राजमार्ग 135 पर स्थित ड्रमंडगंज घाटी एक बार फिर गंभीर सड़क हादसों को लेकर चर्चा में है। हाल ही में हुए भीषण दुर्घटना में 11 लोगों की मौत के बाद सड़क निर्माण की गुणवत्ता और डिजाइन पर सवाल खड़े हो गए हैं।
करीब चार वर्ष पहले 2347 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए वाराणसी-हनुमना मार्ग के इस हिस्से में लगातार हो रहे हादसों ने स्थानीय लोगों और अधिवक्ताओं में रोष पैदा कर दिया है।

अधिवक्ताओं का प्रदर्शन, एफआईआर की मांग
गुरुवार को लालगंज तहसील मुख्यालय पर अधिवक्ताओं ने प्रदर्शन कर कार्यदायी संस्था के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। उन्होंने एसडीएम व जॉइंट मजिस्ट्रेट महेंद्र सिंह को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
अधिवक्ताओं का आरोप है कि घाटी क्षेत्र में बने फोरलेन सड़क के मोड़ और ढलान तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं हैं। यही वजह है कि आए दिन, खासकर भारी वाहन, संतुलन खोकर दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं।
तकनीकी ऑडिट और पुनः डिजाइन की मांग
प्रदर्शनकारियों ने पूरे मार्ग का उच्च स्तरीय तकनीकी ऑडिट कराने की मांग की। उनका कहना है कि जहां भी खामियां मिलें, वहां केवल मरम्मत नहीं बल्कि सड़क का पुनः डिजाइन कर निर्माण कराया जाए।
अधिवक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि जिम्मेदार विभाग स्थायी समाधान की बजाय अस्थायी सुधार तक सीमित है, जिससे दुर्घटनाओं पर कोई प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है।
स्थानीय लोगों में भय का माहौल
लगातार हो रही दुर्घटनाओं के कारण क्षेत्र में दहशत का माहौल है। लोगों ने प्रशासन से जल्द ठोस कदम उठाने की अपील की है।
प्रदर्शन में राजेंद्र मौर्य, अनिल मौर्य, धनेश्वर गौतम, विपिन तिवारी सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।
अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
सड़क सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है।

