सितंबर से शुरू होगा भूमि अधिग्रहण, 41 गांव होंगे प्रभावित
प्रयागराज (जनवार्ता)। संगम नगरी में यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने की दिशा में रिंग रोड परियोजना का दूसरा चरण जल्द गति पकड़ेगा। प्रस्तावित Prayagraj Ring Road Phase-2 के तहत भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया इस वर्ष सितंबर से शुरू होने की संभावना है। परियोजना के पूर्ण होने के बाद शहर में जाम की समस्या से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

दूसरे चरण में करीब 41.662 किलोमीटर लंबी रिंग रोड का निर्माण किया जाएगा, जो सोरांव तहसील के माधोपुर (एनएच-19 के पास) से करछना तहसील के अमिलिया गांव तक विकसित होगी। इस चरण के लिए लगभग 200 से 250 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत की जाएगी, जिससे 41 गांवों के सात हजार से अधिक किसान प्रभावित होंगे।
परियोजना में आधुनिक आधारभूत संरचना पर विशेष जोर दिया गया है। सड़क, नहर और रेलवे लाइनों के नीचे से लगभग 120 भूमिगत पुलिया बनाई जाएंगी। इसके अलावा चार फ्लाईओवर और तीन रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) का भी निर्माण प्रस्तावित है।
रिंग रोड के दूसरे चरण की प्रमुख विशेषता गंगा और यमुना नदियों पर बनने वाले दो सिक्स-लेन पुल हैं। गंगा पर लगभग 3.5 किलोमीटर और यमुना पर करीब 1.2 किलोमीटर लंबा पुल बनाया जाएगा, जिससे शहर के बाहरी क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी और मजबूत होगी।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अधिकारियों के अनुसार परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार हो चुकी है। तकनीकी विशेषज्ञों की टीम अगले पांच से छह महीनों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू करेगी।
गौरतलब है कि रिंग रोड के पहले चरण में करीब 30 किलोमीटर सड़क निर्माण प्रस्तावित है, जिसमें 80 से 85 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। दोनों चरणों के पूर्ण होने पर रिंग रोड का कुल दायरा 70 से 72 किलोमीटर तक पहुंच जाएगा, जिससे शहर में भारी वाहनों का दबाव कम होगा और आवागमन अधिक सुगम बनेगा।

