सोनभद्र में जगद्गुरु शंकराचार्य का भव्य स्वागत, गौसंरक्षण व धर्मजागरण का लिया संकल्प
सोनभद्र (जनवार्ता)। सनातन वैदिक परंपरा, गौसंरक्षण एवं धर्मजागरण के उद्देश्य से संचालित “गविष्ठी यात्रा” के अंतर्गत ज्योतिर्मठ बदरिकाश्रम के ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती जी महाराज का आगमन नगर स्थित श्री राम जानकी मंदिर न्यास परिसर में श्रद्धा, भक्ति और वैदिक मंगलध्वनियों के बीच सम्पन्न हुआ। उनके स्वागत में श्रद्धालुओं, गौभक्तों और सनातन धर्मावलम्बियों ने शंखनाद, घड़ियाल एवं घंटियों की गूंज के साथ भव्य अभिनंदन किया।


मंदिर के तोरणद्वार पर महिलाओं ने मंगल कलश के साथ पूज्य शंकराचार्य जी का स्वागत किया। जयघोष और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उन्होंने श्रीराम-जानकी सरकार सहित मंदिर परिसर में विराजमान देवी-देवताओं का विधिवत पूजन-अर्चन कर राष्ट्र, धर्म एवं गौसंरक्षण की मंगलकामना की।
इस अवसर पर मंदिर परिसर में प्रस्तावित भगवान परशुराम की प्रतिमा स्थापना हेतु शिला पूजन का वैदिक अनुष्ठान भी सम्पन्न कराया गया। कार्यक्रम में भगवान परशुराम के आदर्शों के संरक्षण एवं सनातन संस्कृति के प्रसार का संकल्प लिया गया।
मंदिर न्यास के अध्यक्ष डॉ. मार्कण्डेय राम पाठक ने जगद्गुरु शंकराचार्य की पादुका पूजन कर उनका अभिनंदन किया। वहीं मंदिर न्यास के प्रबंधक आशुतोष पाठक ने स्वागताध्यक्ष के रूप में समस्त व्यवस्थाओं का संचालन किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर वैदिक मंत्रोच्चार, हरिनाम संकीर्तन और गौमाता के जयघोष से भक्तिमय बना रहा।
सूर्यास्त के पश्चात सनातन परंपरा के अनुसार मौन-व्रत की मर्यादा का पालन किए जाने के कारण जगद्गुरु शंकराचार्य ने सार्वजनिक संबोधन नहीं दिया। हालांकि उनके सहचर संतों एवं आचार्यों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को “गविष्ठी संकल्प” दिलाते हुए गौसंरक्षण, भारतीय संस्कृति और धर्मरक्षा के लिए समाज को संगठित एवं जागरूक रहने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं एवं गौभक्तों की उपस्थिति रही। प्रमुख रूप से रामानंद पाण्डेय, कौशलेश पाठक, धीरज पाण्डेय, शशांक मिश्रा, मृदुल मिश्रा, मोनू पाण्डेय, अभिषेक चौबे, जितेन्द्र देव, संदीप शुक्ला, विनोद, कैलाश नाथ, रोहिल मिश्रा, प्रांजल, अनुपम, राजेश द्विवेदी, अरविन्द सिंह, विकास, सुशील पाठक, शैलेन्द्र चतुर्वेदी, बद्रीनारायण पाठक और राजीव त्रिपाठी सहित अनेक धर्मप्रेमी उपस्थित रहे।
पूरे कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्तिभाव से आलोकित रहा। श्रद्धालुओं ने जगद्गुरु शंकराचार्य के दर्शन एवं आशीर्वचनरूप संकल्प प्राप्त कर स्वयं को धन्य अनुभव किया।

