चार सेंटीमीटर प्रति घंटे बढ़ रहा गंगा का पानी
जलस्तर चेतावनी स्तर से अभी 3.20 मीटर नीचे
वाराणसी (जनवार्ता)। गंगा की धारा ने एक बार फिर अपनी चाल बदलनी शुरू कर दी है। सावन के अंतिम दौर में जहां काशी की आस्था गंगा तटों पर उमड़ रही है, वहीं नदी का बढ़ता जलस्तर प्रशासन और तटवर्ती इलाकों के लिए सतर्कता का संकेत दे रहा है। मंगलवार शाम चार बजे केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के राजघाट गेज स्थल पर गंगा का जलस्तर 67.06 मीटर दर्ज किया गया। नदी का पानी फिलहाल चार सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है।
हालांकि मौजूदा जलस्तर अभी चेतावनी सीमा से काफी नीचे है, लेकिन बढ़ते रुख को देखते हुए नदी की निगरानी तेज रखना जरूरी है। राजघाट पर गंगा का चेतावनी स्तर 70.262 मीटर, जबकि खतरे का स्तर 71.262 मीटर निर्धारित है। इस लिहाज से वर्तमान जलस्तर चेतावनी बिंदु से करीब 3.20 मीटर और खतरे के निशान से करीब 4.20 मीटर नीचे है। गंगा का अब तक का उच्चतम बाढ़ स्तर (एचएफएल) 73.901 मीटर दर्ज है।
गंगा का पानी बढ़ना काशी के लिए महज एक आंकड़ा नहीं होता। नदी के साथ यहां जीवन की लय जुड़ी है। घाटों की सीढ़ियां, नावों की आवाजाही, तटवर्ती बस्तियां और रोजमर्रा की गतिविधियां सीधे जलस्तर के उतार-चढ़ाव से प्रभावित होती हैं। लिहाजा कुछ सेंटीमीटर की बढ़ोतरी भी प्रशासनिक निगरानी के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
फिलहाल स्थिति सामान्य सीमा में है और खतरे के निशान से नदी काफी नीचे बह रही है। बावजूद इसके, चार सेंटीमीटर प्रतिघंटे की बढ़त आने वाले घंटों में जलस्तर की दिशा पर नजर रखने की जरूरत को रेखांकित करती है। जलस्तर में लगातार वृद्धि होने पर निचले घाटों और तटीय क्षेत्रों में असर दिखाई देने की आशंका बढ़ सकती है।
गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी अनावश्यक जोखिम से बचने की जरूरत है। खासकर घाटों पर स्नान, नौका संचालन और नदी के किनारे गतिविधियों के दौरान सतर्कता बरतना जरूरी होगा। प्रशासन के लिए भी चुनौती यही है कि आस्था और जनजीवन के बीच सुरक्षा का संतुलन बना रहे।
काशी में गंगा केवल नदी नहीं, जीवन और आस्था की धड़कन है। इसलिए उसकेबढ़ते जलस्तर की हर हलचल अपने साथ एक संदेश लेकर आती है। फिलहाल खतरे की कोई स्थिति नहीं है, लेकिन गंगा की बढ़ती चाल को देखते हुए निगाहें नदी के अगले रुख पर टिक गई हैं।


