सारनाथ को मिला विश्व धरोहर स्थल का दर्जा
उत्तर प्रदेश के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि
वाराणसी (जनवार्ता) । वाराणसी के विश्वप्रसिद्ध बौद्ध तीर्थ सारनाथ को यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल (वर्ल्ड हेरिटेज साइट) का दर्जा प्रदान कर दिया है। यह घोषणा शनिवार को पेरिस में आयोजित यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र में की गई। इस उपलब्धि के साथ सारनाथ को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिली है और उत्तर प्रदेश के लिए यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है।

सारनाथ बौद्ध धर्म का अत्यंत पवित्र स्थल है, जहां भगवान गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना प्रथम उपदेश देकर धर्मचक्र प्रवर्तन किया था। यहां स्थित धम्मेक स्तूप, चौखंडी स्तूप तथा सारनाथ संग्रहालय बौद्ध इतिहास, कला और संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं। सम्राट अशोक द्वारा निर्मित धम्मेक स्तूप आज भी विश्वभर के बौद्ध श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है।
यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होने से सारनाथ की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिलेगी। साथ ही पर्यटन को बढ़ावा मिलने, स्थानीयy अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने और रोजगार के नए अवसर सृजित होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से धरोहर संरक्षण और पर्यटन अवसंरचना के विकास को भी गति मिलेगी।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे प्रदेश के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि सारनाथ को मिला यह सम्मान राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत की वैश्विक पहचान को और सशक्त करेगा तथा इसके संरक्षण और विकास के लिए सरकार निरंतर कार्य करती रहेगी।
सारनाथ को विश्व धरोहर का दर्जा मिलने से भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई प्रतिष्ठा मिली है। अब यह ऐतिहासिक स्थल विश्वभर के पर्यटकों, शोधकर्ताओं और बौद्ध श्रद्धालुओं के लिए और अधिक आकर्षण का केंद्र बनेगा।

