18 दिन में पांच एनकाउंटर: सम्राट सरकार में अपराधियों पर पुलिस का शिकंजा तेज
पटना, (जनवार्ता)। बिहार में नई सरकार बनने के बाद अपराधियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई लगातार तेज होती दिख रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के “अपराधियों का पिंडदान” वाले बयान के बाद राज्यभर में पुलिस अभियान चर्चा में है। पिछले 18 दिनों में मगध, अंग और सारण क्षेत्र में कुल पांच एनकाउंटर हो चुके हैं, जिनमें तीन अपराधी घायल हुए जबकि दो मुठभेड़ों में आरोपियों की मौत हुई।

ताजा मामला रविवार सुबह सीवान जिले का है, जहां चर्चित हर्ष सिंह हत्याकांड के मुख्य आरोपी सोनू यादव को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया। सोनू यादव पर 29 अप्रैल को भाजपा नेता और पूर्व एमएलसी मनोज सिंह के भांजे हर्ष सिंह की गोली मारकर हत्या करने का आरोप था। घटना में हर्ष के बहनोई भी घायल हुए थे, जिनका इलाज चल रहा है। पुलिस के अनुसार हुसैनगंज थाना क्षेत्र में घेराबंदी के दौरान आरोपी ने फायरिंग की, जिसके जवाब में हुई कार्रवाई में वह मारा गया।
इससे पहले 30 अप्रैल को सीवान पुलिस ने इसी हत्याकांड से जुड़े आरोपी छोटू यादव को मुठभेड़ में घायल किया था। पुलिस की गोली उसके पैर में लगी थी, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया।
भागलपुर जिले के सुल्तानगंज में 29 अप्रैल को नगर परिषद सभापति पर हुए हमले के कथित मुख्य साजिशकर्ता रामधनी यादव की भी पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई थी। एक दिन पहले नगर परिषद कार्यालय में हुई गोलीबारी में सभापति राजकुमार और कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण कुमार गंभीर रूप से घायल हुए थे। बाद में कृष्ण भूषण कुमार की मौत हो गई थी। जांच में व्यक्तिगत रंजिश की बात सामने आई थी। पुलिस कार्रवाई के दौरान एक डीएसपी और दो इंस्पेक्टर भी घायल हुए थे।
22 अप्रैल को पटना के रामकृष्णा नगर इलाके में ज्वेलरी लूटकांड के आरोपी दिलीप को पुलिस ने मुठभेड़ में घायल कर दिया था। पुलिस के मुताबिक हथियार बरामदगी के दौरान आरोपी ने फायरिंग की, जिसके जवाब में पुलिस ने उसके पैर में गोली मारी। इस मामले में चार अपराधियों की संलिप्तता बताई गई थी।
वहीं 26 अप्रैल को नवादा जिले में पुलिस ने 50 हजार रुपये के इनामी अपराधी मिंटू यादव को मुठभेड़ में घायल कर गिरफ्तार किया था। आरोपी पर एक मेडिकल प्रैक्टिशनर की हत्या समेत कई गंभीर मामले दर्ज थे। पुलिस ने उसके पास से देसी कट्टा और कारतूस बरामद किए थे। अधिकारियों के अनुसार वह अंतरराज्यीय अपराधी गिरोह से जुड़ा हुआ था।
लगातार हो रही इन पुलिस कार्रवाइयों को लेकर बिहार की राजनीति में भी बहस तेज हो गई है। सरकार इसे अपराध नियंत्रण की सख्त नीति बता रही है, जबकि विपक्ष पुलिस कार्रवाई की निष्पक्षता और कानून व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है।

