52 वर्षों बाद अनुसुइया आश्रम में गूंजेगा ‘यथार्थ गीता’ का संदेश, 5 मई को स्वामी अड़गड़ानंद महाराज का आगमन

52 वर्षों बाद अनुसुइया आश्रम में गूंजेगा ‘यथार्थ गीता’ का संदेश, 5 मई को स्वामी अड़गड़ानंद महाराज का आगमन

वाराणसी (जनवार्ता)। कई वर्षों के लंबे अंतराल के बाद परम पूज्य स्वामी अड़गड़ानंद महाराज 5 मई को चित्रकूट स्थित परमहंस आश्रम अनुसुइया पहुंचकर भक्तों को ‘यथार्थ गीता’ का दिव्य संदेश देंगे। उनके आगमन को लेकर देशभर से श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है।

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जानकारी के अनुसार, स्वामी अड़गड़ानंद महाराज हाल ही में मिर्जापुर जिले के शक्तेशगढ़ स्थित परमहंस आश्रम में सत्संग करने के बाद मध्य प्रदेश के सीधी जिले स्थित परमहंस आश्रम वरचर पहुंचे। वहां से उन्होंने अपने गुरुदेव परम पूज्य परमहंस स्वामी श्री परमानंद जी महाराज के समाधि स्थल, अनुसुइया आश्रम (चित्रकूट) जाने का निर्णय लिया।

स्वामी जी ने अपने शिष्यों को 5 मई को गुरुदेव के समाधि स्थल पर दर्शन की तैयारी करने के निर्देश दिए हैं। उनके आगमन की सूचना मिलते ही अनुसुइया आश्रम में तैयारियां तेज हो गई हैं। आश्रम परिसर में देश के विभिन्न राज्यों दिल्ली, पंजाब, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और हरियाणा सहित अन्य स्थानों से बड़ी संख्या में संत एवं भक्तों के पहुंचने की संभावना है।

कार्यक्रम के दौरान स्वामी अड़गड़ानंद महाराज पहले अपने गुरुदेव के समाधि स्थल पर दर्शन-पूजन करेंगे, इसके पश्चात वे श्रद्धालुओं को सत्संग के माध्यम से ‘यथार्थ गीता’ का संदेश देंगे।

बताया जाता है कि स्वामी अड़गड़ानंद महाराज लगभग 52 वर्ष पूर्व अपने गुरुदेव के निर्देश पर अनुसुइया आश्रम से परमहंस आश्रम जगतानंद गए थे, जहां उन्होंने मानव कल्याण के लिए ‘यथार्थ गीता’ की रचना की। उन्होंने वहां करीब 26 वर्षों तक सत्संग कर भक्तों को ईश्वर मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। वर्ष 1995 में वे शक्तेशगढ़ आश्रम पहुंचे, जहां आज भी देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनके दर्शन के लिए आते हैं।

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स्वामी जी के आगमन को लेकर आश्रम में भव्य आयोजन की तैयारियां जारी हैं और पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्साह का माहौल बना हुआ है।

Shiv murti

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