गुप्तकाशी विश्वनाथ मंदिर : चारधाम यात्रा का प्रमुख आस्था केंद्र
रुद्रप्रयाग । उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए गुप्तकाशी स्थित विश्वनाथ मंदिर विशेष धार्मिक महत्व रखता है। केदारनाथ धाम मार्ग पर स्थित यह प्राचीन शिव मंदिर श्रद्धा, इतिहास और पौराणिक मान्यताओं का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। मंदाकिनी घाटी की प्राकृतिक सुंदरता के बीच स्थित यह मंदिर हर वर्ष हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

मान्यता है कि गुप्तकाशी का विश्वनाथ मंदिर वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर के समान महत्व रखता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव ने यहीं माता पार्वती को विवाह का प्रस्ताव दिया था। यही कारण है कि यह स्थान शिव-पार्वती के पवित्र मिलन स्थल के रूप में भी प्रसिद्ध है।
महाभारत काल से जुड़ी एक मान्यता के अनुसार, कुरुक्षेत्र युद्ध के बाद पांडव भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते थे, लेकिन भगवान शिव उनसे नाराज होकर इस स्थान पर गुप्त रूप में आ गए थे। इसी कारण इस क्षेत्र का नाम “गुप्तकाशी” पड़ा।
केदारनाथ धाम की डोली यात्रा के दौरान भी इस मंदिर का विशेष महत्व है। परंपरा के अनुसार बाबा केदार की डोली पहले दिन गुप्तकाशी में विश्राम करती है। मंदिर परिसर में मुख्य विश्वनाथ मंदिर के साथ अर्धनारीश्वर मंदिर और पवित्र मणिकर्णिक कुंड भी स्थित है। मान्यता है कि इस कुंड में गंगा और यमुना की धाराएं मिलती हैं।
केदारनाथ से लगभग 47 किलोमीटर पहले स्थित यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख पड़ाव माना जाता है। भक्त यहां पूजा-अर्चना के साथ हिमालयी प्राकृतिक सौंदर्य का भी आनंद लेते हैं।

