केरल में कांग्रेस की बड़ी वापसी, 7 साल बाद चार राज्यों में होंगे कांग्रेस के मुख्यमंत्री
तिरुवनंतपुरम। केरल विधानसभा चुनाव 2026 में कांग्रेस नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) ने बड़ी बढ़त हासिल करते हुए राज्य की राजनीति में जोरदार वापसी के संकेत दिए हैं। 140 सदस्यीय विधानसभा में यूडीएफ करीब 90 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। इस प्रदर्शन के साथ कांग्रेस ने सात साल बाद एक साथ चार राज्यों में सरकार बनाने का रिकॉर्ड भी हासिल कर लिया है।

केरल की जीत कांग्रेस के लिए राजनीतिक और संगठनात्मक दोनों लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है। राज्य से प्रियंका गांधी लोकसभा सांसद हैं, जबकि पार्टी के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल भी केरल से आते हैं। कांग्रेस संगठन में महासचिव का पद पार्टी अध्यक्ष के बाद सबसे प्रभावशाली माना जाता है। ऐसे में इस जीत को पार्टी नेतृत्व के लिए भी बड़ा संदेश माना जा रहा है।
कांग्रेस की जीत के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण बताए जा रहे हैं। चुनाव से पहले पार्टी ने यूडीएफ गठबंधन को मजबूत करने के लिए स्थानीय स्तर की तीन छोटी पार्टियों को अपने साथ जोड़ा। इसका सीधा फायदा यह हुआ कि विपक्षी वोटों का बिखराव कम हुआ और कई सीटों पर कांग्रेस गठबंधन को लाभ मिला।
चुनाव से पहले मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर पार्टी के भीतर मतभेद की चर्चाएं जरूर थीं, लेकिन प्रचार अभियान के दौरान शीर्ष नेताओं ने सार्वजनिक बयानबाजी से दूरी बनाए रखी। के.सी. वेणुगोपाल, रमेश चेन्निथल्ला और वीडी सतीशन लगातार एक साथ प्रचार करते नजर आए, जिससे कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के बीच एकजुटता का संदेश गया।
कांग्रेस ने चुनाव प्रचार में यह मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया कि वाम मोर्चा सरकार के दौरान राज्य में भाजपा का प्रभाव लगातार बढ़ा है। पार्टी की इस रणनीति का असर मुस्लिम और ईसाई मतदाताओं पर दिखाई दिया, जो बड़ी संख्या में यूडीएफ के पक्ष में लामबंद हुए। शुरुआती रुझानों में भाजपा केवल दो सीटों पर बढ़त बनाती दिखी।
इस चुनाव में कांग्रेस ने नए चेहरों और जमीनी प्रचार पर भी खास जोर दिया। पार्टी ने कई नए उम्मीदवारों को मौका दिया और लोकसभा चुनाव हार चुके नेताओं को भी विधानसभा चुनाव में उतारा। बड़े जनसभाओं की बजाय डोर-टू-डोर कैंपेन पर अधिक फोकस किया गया। साथ ही कांग्रेस ने चुनाव को राष्ट्रीय मुद्दों से दूर रखते हुए स्थानीय सवालों पर केंद्रित रखा।
युवा और शिक्षित मतदाताओं तक पहुंच बनाने के लिए कांग्रेस ने सचिन पायलट, शशि थरूर और इमरान प्रतापगढ़ी जैसे नेताओं को प्रचार में उतारा। इन नेताओं ने मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की उम्र और सरकार की कार्यशैली को मुद्दा बनाते हुए बदलाव की जरूरत पर जोर दिया।
यह जीत कांग्रेस के लिए इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि 2018 में पार्टी ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में सरकार बनाई थी, जबकि पंजाब में उसकी पहले से सरकार थी। उस समय 2014 के बाद पहली बार कांग्रेस के चार मुख्यमंत्री एक साथ सत्ता में आए थे। पुडुचेरी में भी कांग्रेस समर्थित सरकार थी। हालांकि बाद के वर्षों में पार्टी को लगातार राजनीतिक झटके लगे। 2020 में मध्य प्रदेश की सरकार गिर गई और 2022 में पंजाब में कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई। इसके बाद कांग्रेस के पास सीमित राज्यों में ही सरकार बची थी।
बाद में हिमाचल प्रदेश में जीत और फिर 2023 में कर्नाटक तथा तेलंगाना में सत्ता हासिल करने से पार्टी को कुछ मजबूती जरूर मिली, लेकिन राजस्थान और छत्तीसगढ़ गंवाने से कांग्रेस का आंकड़ा फिर तीन राज्यों तक सिमट गया था। अब केरल में संभावित जीत के बाद कांग्रेस के मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना और केरल में होंगे। पार्टी के लिए इसे लंबे समय बाद संगठनात्मक मनोबल बढ़ाने वाली बड़ी राजनीतिक सफलता माना जा रहा है।

