अयोध्या से लौट रहे श्रद्धालुओं की कार कंटेनर में घुसी, तीन की मौत; एक्सप्रेसवे सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
लखनऊ (जनवार्ता)। उत्तर प्रदेश के आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर रविवार देर रात हुए भीषण सड़क हादसे में अयोध्या से दर्शन कर लौट रहे तीन श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि पांच अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा फतेहाबाद क्षेत्र में रात करीब 1:40 बजे हुआ, जब तेज रफ्तार कार आगे चल रहे कंटेनर में पीछे से जा टकराई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और वाहन कंटेनर के पिछले हिस्से में फंस गया। दुर्घटना में राजस्थान के सीकर निवासी शंकरलाल, उनकी पत्नी प्रीति तथा बिहार निवासी सुनील कुमार की मौके पर ही मौत हो गई। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कार चला रहे चालक को संभवतः झपकी आ गई थी, जिसके कारण वाहन अनियंत्रित होकर कंटेनर से जा भिड़ा। पुलिस ने मामला दर्ज कर कंटेनर चालक की तलाश शुरू कर दी है।
इस हादसे के बाद एक्सप्रेसवे की सुरक्षा व्यवस्था और सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यूपीडा (उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण) के पास पहले से ही दुर्घटनाओं के आंकड़े मौजूद थे, जिनमें चालक की थकान और झपकी को प्रमुख कारण बताया गया था।
बताया जा रहा है कि वर्ष 2021 से 2025 के बीच आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर 7,024 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें आधे से अधिक मामलों में चालक की झपकी या थकान जिम्मेदार पाई गई। साथ ही अधिकांश हादसे देर रात से सुबह के बीच हुए।
सूत्रों के अनुसार, सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए रात्रिकालीन गति सीमा कम करने, ड्रोन निगरानी बढ़ाने, यात्रियों के लिए बेहतर विश्राम सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा सस्ते भोजन-चाय केंद्र विकसित करने जैसे प्रस्तावों पर विचार किया गया था। हालांकि इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में देरी होने के कारण सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
ताजा हादसे ने एक बार फिर एक्सप्रेसवे पर रात्रिकालीन यात्रा, चालक की थकान और सड़क सुरक्षा उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता को उजागर कर दिया है। स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियों से दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाने की मांग तेज हो गई है।


