राम मंदिर दान विवाद में नया मोड़

राम मंदिर दान विवाद में नया मोड़

एसआईटी जांच में सामने आए चौंकाने वाले दावे

“अयोध्या (जनवार्ता)। राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दान स्वरूप अर्पित की गई चांदी की वस्तुओं के कथित रूप से गायब होने के मामले में जांच तेज हो गई है। विशेष जांच दल (एसआईटी) अब उन श्रद्धालुओं और बड़े दानदाताओं से संपर्क कर रही है, जिन्होंने मंदिर ट्रस्ट के कर्मचारियों को आभूषण, चांदी एवं अन्य कीमती वस्तुएं सौंपी थीं।

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जांच के दौरान मुंबई के कारोबारी अनिल विश्वकर्मा का बयान दर्ज किया गया है। उन्होंने दावा किया है कि उनके परिवार ने रामलला को तीन किलोग्राम चांदी की माला तथा एक किलोग्राम चांदी की चरण पादुका अर्पित की थी, लेकिन उन्हें अब तक मंदिर प्रशासन की ओर से कोई रसीद उपलब्ध नहीं कराई गई। वहीं, इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के नॉर्थ इंडिया हेड अनुराग रस्तोगी ने भी व्यापारियों द्वारा दान की गई करीब 60 किलोग्राम चांदी का कोई स्पष्ट लेखा-जोखा सामने नहीं आने की बात कही है।

महंत आचार्य विनोद मिश्रा के अनुसार, अनिल विश्वकर्मा का परिवार 29 अक्टूबर 2025 को लगभग 200 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर अयोध्या पहुंचा था। परिवार अपने साथ चांदी की विशेष माला और 64 शुभ प्रतीकों से अलंकृत चरण पादुका लेकर आया था। महंत का आरोप है कि मंदिर परिसर में एक व्यक्ति ने उन्हें वीआईपी मार्ग से गर्भगृह तक पहुंचाया और बाद में दान स्वरूप लाई गई वस्तुएं अपने कब्जे में ले लीं। रसीद मांगने पर श्रद्धालुओं को जांच और सत्यापन की प्रक्रिया का हवाला देकर टाल दिया गया।

महंत ने यह भी दावा किया कि बाद में उन्हें बताया गया कि चांदी की माला और चरण पादुका को पश्चिम बंगाल भेजकर पिघलाया गया, जिससे पूजा-पाठ में उपयोग होने वाले चांदी के बर्तन तैयार किए जाने थे। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

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इसी बीच अनुराग रस्तोगी ने बताया कि सर्राफा व्यापारियों की ओर से दान की गई चांदी को विशेष ईंटों के रूप में तैयार कर मंदिर को सौंपा गया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके द्वारा दान किए गए चांदी के दीपक, कटोरे तथा अन्य पूजन सामग्री वर्तमान में मंदिर परिसर में दिखाई नहीं दे रही है।

राम मंदिर दान विवाद अब आस्था और पारदर्शिता से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा बन गया है। एसआईटी सभी दानदाताओं के बयान, उपलब्ध दस्तावेजों, रसीदों और अन्य साक्ष्यों की गहन जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दान में मिली वस्तुओं के संबंध में लगाए गए आरोप कितने सही हैं और उनकी वास्तविक स्थिति क्या है।

Shiv murti

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