प्राइवेट अस्पतालों के स्टोर पर महंगी एफडीसी दवाओं की बिक्री
वाराणसी (जनवार्ता)। शहर के निजी अस्पतालों के परिसर में संचालित मेडिकल स्टोरों पर महंगी फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (एफडीसी) दवाएं बेचकर मरीजों से अधिक कीमत वसूलने के आरोप सामने आए हैं। मरीजों का कहना है कि डॉक्टर के पर्चे पर लिखी कुछ ब्रांडेड कॉम्बिनेशन दवाएं बाजार में आसानी से उपलब्ध नहीं होतीं, जिसके कारण उन्हें अस्पताल के स्टोर से ही दवा खरीदनी पड़ती है।

कई मरीजों के अनुसार, बाजार में कम कीमत पर उपलब्ध दवाएं अस्पताल के स्टोर पर अधिक कीमत में बेची जाती हैं। रामनगर निवासी एक मरीज के तीमारदार ने बताया कि डॉक्टर ने तीन दवाओं का कॉम्बिनेशन लिखा था। बाजार में दवा नहीं मिलने पर उसे अस्पताल के स्टोर से करीब 400 रुपये में खरीदना पड़ा, जबकि संबंधित दवाएं अलग-अलग या जेनेरिक नाम से कम कीमत में उपलब्ध थीं।
अस्पतालों के स्टोरों पर प्रेगालीव एनटीएम, कैल्सीक्विक-के2 फोर्ट, जीरोडोल एसपी और न्यूरोबायोन जैसी कॉम्बिनेशन दवाओं की बिक्री का उल्लेख किया गया है। दवा विक्रेता समिति के मंत्री संजय सिंह ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में ब्रांडेड कॉम्बिनेशन दवाओं के जरिए अधिक मार्जिन कमाने की कोशिश की जाती है। उनका कहना है कि डॉक्टरों और स्टोर संचालकों के बीच कथित सांठगांठ के कारण मरीजों को महंगी दवाएं खरीदनी पड़ती हैं।
केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट फेडरेशन उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष संदीप चतुर्वेदी ने कहा कि निजी स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के बीच मरीजों के हितों की निगरानी जरूरी है। वहीं, आइएमए बनारस के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अरविंद सिंह ने एफडीसी दवाओं और उनके मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता की जरूरत बताते हुए एनपीपीए से स्पष्ट मूल्य निर्धारण नीति बनाने की मांग की।
ड्रग इंस्पेक्टर चंद्रेश द्विवेदी ने कहा कि शिकायत मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। हालांकि, मरीजों के डर या मजबूरी के कारण कई मामले सामने नहीं आ पाते हैं।

