दिल्ली–देहरादून ग्रीनफील्ड हाईवे से ट्रैफिक दबाव कम, सफर हुआ आसान
मेरठ (जनवार्ता)। दिल्ली–देहरादून ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल हाईवे (इकोनॉमिक कॉरिडोर) का असर अब जमीनी स्तर पर साफ दिखाई देने लगा है। इस नए मार्ग के शुरू होने से दिल्ली–मेरठ एक्सप्रेसवे और मेरठ–रुड़की–हरिद्वार हाईवे (पुराना एनएच-58) पर वाहनों का दबाव घटा है, जिससे यातायात पहले की तुलना में अधिक सुगम हो गया है।

दिल्ली से देहरादून और मसूरी की ओर जाने वाले वाहन अब तेजी से नए ग्रीनफील्ड हाईवे की ओर शिफ्ट हो रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, दोनों प्रमुख मार्गों पर वाहनों की संख्या में लगभग सात प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई है। खास बात यह है कि दिल्ली से संचालित होने वाली ई-बसें अब पूरी तरह इसी नए कॉरिडोर का उपयोग कर रही हैं, जिससे पुराने मार्गों पर अतिरिक्त भार कम हुआ है।
आने वाले समय में स्थिति और बेहतर होने की उम्मीद है। जून माह में हरिद्वार कनेक्टर शुरू होने के बाद ट्रैफिक व्यवस्था में और सुधार आएगा। इससे मेरठ होकर गुजरने वाले मार्गों पर दबाव और कम होगा तथा वाहनों की रफ्तार में वृद्धि देखने को मिलेगी।
नए हाईवे के शुरू होने से यात्रा समय में भी उल्लेखनीय कमी आई है। दिल्ली से देहरादून की दूरी अब लगभग ढाई घंटे में तय की जा रही है, जबकि पहले यही सफर मेरठ होकर करीब छह घंटे में पूरा होता था। वहीं मेरठ से देहरादून जाने में पुराने एनएच-58 मार्ग से जहां लगभग साढ़े चार घंटे लगते थे, वहीं नए कॉरिडोर से यह दूरी करीब तीन घंटे बीस मिनट में पूरी हो रही है।
वीकेंड के दौरान टोल प्लाजा के आंकड़े भी इस बदलाव की पुष्टि करते हैं। मेरठ–रुड़की–हरिद्वार हाईवे और दिल्ली–मेरठ एक्सप्रेसवे दोनों पर वाहनों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे जाम की स्थिति में सुधार आया है।
अब यह ग्रीनफील्ड हाईवे Google Maps, Apple Maps और MapmyIndia जैसे डिजिटल मैप प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध है, जिससे यात्रियों को अपने सफर के लिए बेहतर और तेज मार्ग चुनने में सुविधा मिल रही है।
टोल प्लाजा प्रबंधन के अनुसार, नए कॉरिडोर के शुरू होने के बाद दिल्ली और हरियाणा से आने वाले वाहनों की संख्या में कमी आई है। इसका सीधा लाभ पुराने हाईवे पर चलने वाले स्थानीय यात्रियों को मिल रहा है और यातायात अधिक व्यवस्थित हो गया है।
कुल मिलाकर, दिल्ली–देहरादून ग्रीनफील्ड हाईवे न केवल यात्रा समय घटाने में सफल रहा है, बल्कि क्षेत्रीय यातायात व्यवस्था को भी अधिक सुगम और संतुलित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

