फर्जी मैट्रिमोनियल कंपनी बना शादी का झांसा देकर ठगी करने वाली 10 महिलाएं गिरफ्तार
वाराणसी (जनवार्ता)। कमिश्नरेट पुलिस की साइबर सेल और कैंट थाना पुलिस ने अर्दली बाजार स्थित एक फर्जी मैट्रिमोनियल कंपनी का पर्दाफाश करते हुए उसकी संचालिका समेत 10 महिलाओं को गिरफ्तार किया है। गिरोह अखबारों में आकर्षक वैवाहिक विज्ञापन प्रकाशित कर लोगों को शादी कराने का झांसा देकर ‘लाइफटाइम सब्सक्रिप्शन’ के नाम पर हजारों रुपये की ठगी करता था।

डीसीपी गोमती जोन नीतू कादयान और एसीपी कैंट/साइबर अपूर्व पांडेय ने पुलिस लाइन सभागार में आयोजित प्रेसवार्ता में मामले का खुलासा किया। डीसीपी ने बताया कि प्रतिबिंब पोर्टल और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दो संदिग्ध मोबाइल नंबरों के संबंध में लगातार शिकायतें मिल रही थीं।
तकनीकी जांच, सीएएफ., सीडीआर. और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने अर्दली बाजार स्थित विंध्यवासिनी नगर कॉलोनी के मकान संख्या-104 में संचालित ‘शुभ मैट्रिमोनियल’ पर छापा मारा। कार्रवाई के दौरान तीन कमरों में 10 महिलाएं मोबाइल और कीपैड फोन के जरिए ग्राहकों से बातचीत करती मिलीं।
मौके से पुलिस ने 27 मोबाइल फोन, एक एसर टैबलेट, चार बिल वाउचर, दो रजिस्टर, तीन क्यूआर कोड, एक पेमेंट साउंड बॉक्स, तीन चेकबुक, एक पासबुक, पांच डेबिट कार्ड, किरायानामा, उद्यम पंजीकरण संबंधी दस्तावेज और मैट्रिमोनियल रजिस्ट्रेशन फॉर्म बरामद किए।
पूछताछ में संचालिका रागिनी देवी ने स्वीकार किया कि विभिन्न समाचार पत्रों में आकर्षक वैवाहिक विज्ञापन प्रकाशित कराए जाते थे। विज्ञापन देखने के बाद संपर्क करने वाले लोगों को व्हाट्सएप पर युवक-युवती की प्रोफाइल भेजी जाती थी और परिवार का संपर्क उपलब्ध कराने के नाम पर ‘लाइफटाइम सब्सक्रिप्शन’ शुल्क जमा कराया जाता था। भुगतान के बाद न तो वास्तविक संपर्क कराया जाता था और न ही रकम वापस की जाती थी।
जांच में सामने आया कि एक महिला से चार किश्तों में ₹7,000 और दूसरी से 3,500 रुपया सदस्यता शुल्क के नाम पर वसूले गए। साइबर शिकायतों के चलते कुछ बैंक खाते फ्रीज होने के बाद गिरोह अन्य बैंक खातों और क्यूआर कोड के जरिए भी धनराशि एकत्र कर रहा था।
पुलिस ने इस मामले में रागिनी देवी, सपना यादव, विधि श्रीवास्तव, रायमा परवीन, शमा खान, ज्योति सिंह, अजमत फातिमा, महक श्रीवास्तव, रूबी खान और आराधना शर्मा को गिरफ्तार किया है। सभी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।
डीसीपी नीतू कादयान ने बताया कि बरामद मोबाइल फोन, बैंकिंग दस्तावेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह ने अन्य राज्यों में कितने लोगों को इसी तरह ठगी का शिकार बनाया है और इसमें और कौन-कौन लोग शामिल हैं।

