आचार्य रामचंद्र शुक्ल की साहित्य दृष्टि पर हुआ विमर्श

आचार्य रामचंद्र शुक्ल की साहित्य दृष्टि पर हुआ विमर्श

वाराणसी (जनवार्ता)। संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, साहित्य अकादेमी और श्री अग्रसेन कन्या इंटर कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को कॉलेज सभागार में आचार्य रामचंद्र शुक्ल व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। इसमें आचार्य रामचंद्र शुक्ल के साहित्य, आलोचना पद्धति और हिंदी साहित्य में उनके योगदान पर वक्ताओं ने विचार व्यक्त किए।

rajeshswari

व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों को शुक्ल की प्रमुख कृतियों ‘चिंतामणि’, ‘हिंदी साहित्य का इतिहास’, ‘रस मीमांसा’ और ‘गोस्वामी तुलसीदास’ के बारे में जानकारी दी गई। वक्ताओं ने उनकी साहित्य-दृष्टि और लोकजीवन से जुड़ाव पर चर्चा करते हुए कहा कि शुक्ल ने साहित्य को समाज और जीवन से जोड़कर देखने का महत्वपूर्ण कार्य किया। उनकी रचनाएं आज भी विद्यार्थियों को हिंदी साहित्य को समझने की दृष्टि प्रदान करती हैं।

प्रभात कुमार मिश्र ने कहा कि आचार्य रामचंद्र शुक्ल की रचनाओं में समाज और लोकजीवन की स्पष्ट झलक मिलती है। ‘चिंतामणि’ और ‘हिंदी साहित्य का इतिहास’ जैसी कृतियां विद्यार्थियों को हिंदी साहित्य को समझने की व्यापक दृष्टि देती हैं। मुक्ता ने कहा कि शुक्ल की आलोचना पद्धति ने हिंदी साहित्य को देखने की नई दृष्टि प्रदान की और उनकी रचनाओं को सरल ढंग से समझने से विद्यार्थियों में साहित्य के प्रति रुचि विकसित होती है।

प्रधानाचार्या संगीता बनर्जी ने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं। साहित्य अकादेमी के सहायक संपादक सुशील द्विवेदी ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संयोजन प्रतिभा कुमारी और अर्चना सिंह ने किया, जबकि संचालन प्रतिमा श्रीवास्तव ने किया। व्याख्यानमाला में शिक्षक, विद्यार्थी, साहित्यप्रेमी और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

इसे भी पढ़े   वाराणसी में पहली बार होगा डीपी वर्ल्ड पीजीटीआई नेक्सजेन गोल्फ टूर्नामेंट
Shiv murti

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *