बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में गंभीर चूक: ट्यूमर मरीज के पैर पर हुई सर्जरी, मौत के बाद जांच तेज
वाराणसी, (जनवार्ता)। आईएमएस-बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में चिकित्सकीय लापरवाही का सनसनीखेज मामला सामने आया है। स्पाइनल कॉर्ड ट्यूमर से पीड़ित 71 वर्षीय महिला की निर्धारित न्यूरो सर्जरी की जगह गलती से जांघ का ऑपरेशन कर दिया गया। बाद में महिला की मौत हो गई। परिजनों की शिकायत और प्रारंभिक जांच में लापरवाही की पुष्टि के बाद संस्थान प्रशासन में हड़कंप मच गया है।

जानकारी के अनुसार बलिया निवासी राधिका देवी को स्पाइनल कॉर्ड ट्यूमर की समस्या थी और उन्हें न्यूरोसर्जरी विभाग में भर्ती किया गया था। 7 मार्च को उनका ऑपरेशन निर्धारित था। इसी दौरान ट्रॉमा सेंटर में राधिका नाम की एक अन्य महिला भी भर्ती थी, जिसके पैर में फ्रैक्चर था। आरोप है कि ऑर्थोपेडिक्स विभाग की टीम नाम की समानता के कारण ट्यूमर पीड़ित महिला को ऑपरेशन थिएटर ले गई और उसकी जांघ पर चीरा लगा दिया।
ऑपरेशन के दौरान जब डॉक्टरों को पैर में फ्रैक्चर नहीं मिला, तब उन्हें गलती का एहसास हुआ। इसके बाद हड़बड़ी में जांघ पर टांके लगाकर महिला को बाहर भेज दिया गया। बाद में 18 मार्च को न्यूरोसर्जरी टीम ने स्पाइनल ट्यूमर की सर्जरी की, लेकिन 27 मार्च को महिला की हालत बिगड़ने पर उसकी मौत हो गई।
महिला के पोते मृत्युंजय पाल ने बीएचयू के कुलपति और आईएमएस निदेशक से मामले की शिकायत की। शिकायत के बाद कुलपति ने रिपोर्ट तलब की, जिसमें गलत सर्जरी की बात सामने आई।
मामले की जांच के लिए 2 अप्रैल को चार सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित की गई। शुरुआत में जिस ऑर्थोपेडिक्स टीम पर लापरवाही का आरोप था, उसी टीम के प्रो. अमित रस्तोगी को कमेटी का अध्यक्ष बना दिया गया। हितों के टकराव की बात सामने आने पर बाद में उन्हें हटाकर प्रो. अजीत विक्रम परिहार को कमेटी की जिम्मेदारी सौंपी गई।
आईएमएस प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट मिलते ही दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए ट्रॉमा सेंटर में सर्जिकल सेफ्टी प्रोटोकॉल को और सख्ती से लागू किया जाएगा।
यह घटना अस्पतालों में मरीज की पहचान और सर्जरी से पहले सुरक्षा मानकों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी है।

