संस्कृत विश्वविद्यालय में 30 दुर्लभ ग्रंथों के पुनर्मुद्रण को मंजूरी

संस्कृत विश्वविद्यालय में 30 दुर्लभ ग्रंथों के पुनर्मुद्रण को मंजूरी

प्रकाशन समिति की बैठक में छह नए प्रस्ताव भी स्वीकृत, भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण पर जोर

वाराणसी,  (जनवार्ता) :
सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए प्रकाशन समिति की बैठक में 30 दुर्लभ एवं महत्वपूर्ण ग्रंथों के पुनर्मुद्रण को स्वीकृति दी गई। बैठक रविवार को कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित हुई।

rajeshswari


बैठक में विद्वानों के विस्तृत विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया कि विश्वविद्यालय द्वारा पूर्व में प्रकाशित जिन ग्रंथों की देशभर में लगातार मांग बनी हुई है, उनका पुनर्मुद्रण कराया जाएगा। स्वीकृत ग्रंथों में काशी खंड, बृहत्संहिता, जैमिनी सूत्रम्, अभिधम्मत संग्रहो, काशी महात्म्य, प्रक्रिया कौमुदी, जातकर्म संस्कार, कर्णभेद संस्कार तथा तंत्र संग्रह जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।


इसके साथ ही, विश्वविद्यालय की अध्ययनमाला एवं ग्रंथमाला के अंतर्गत अनुदान मिलने पर प्रकाशन की अनुमति प्रदान की गई। प्रकाशन विभाग को प्राप्त आठ प्रस्तावों में से छह को स्वीकृति देकर नए शोध और लेखन को भी प्रोत्साहन दिया गया।


कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित ग्रंथों की मांग देशभर में बनी रहती है। उन्होंने बताया कि दुर्लभ पांडुलिपियों का संपादन और मूल ग्रंथों का प्रकाशन भारतीय ज्ञान परंपरा को सशक्त बनाता है और इसकी उपयोगिता निरंतर बढ़ाता है।
उन्होंने यह भी बताया कि प्रकाशित ग्रंथों के सुव्यवस्थित वितरण के लिए विश्वविद्यालय का विक्रय विभाग सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है, जिससे पुस्तकों की आपूर्ति मांग के अनुरूप देशभर में सुनिश्चित की जा रही है।


बैठक में कुलसचिव राकेश कुमार, प्रो. शीतला प्रसाद उपाध्याय, प्रो. जीतेन्द्र कुमार, प्रो. महेन्द्र पाण्डेय, प्रो. रमेश प्रसाद, प्रो. दिनेश कुमार गर्ग, डॉ. विशाखा शुक्ला और कौशल कुमार झा सहित कई सदस्य उपस्थित रहे।

इसे भी पढ़े   जौनपुर : पुलिस ने चोरी की 4 बाइक संग तीन शातिर चोरों को किया गिरफ्तार
Shiv murti

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *