जंगल-पहाड़ों के बीच हथियारों की फैक्टरी चलाता था 30 लाख का इनामी बृजेश गंझू
एटीएस के मुताबिक एके-47 और एके-56 जैसे हथियार तैयार कराकर नक्सली संगठनों को करता था सप्लाई, शशिकांत गंझू संभाल सकता है संगठन की कमान
वाराणसी (जनवार्ता)। यूपी एटीएस के साथ मुठभेड़ में मारे गए 30 लाख रुपये के इनामी नक्सली कमांडर बृजेश गंझू को लेकर जांच में कई अहम खुलासे सामने आए हैं। एटीएस के मुताबिक बृजेश गंझू जंगल और पहाड़ी इलाकों में अवैध हथियारों की फैक्टरी संचालित कराता था। यहां एके-47 और एके-56 जैसे अत्याधुनिक हथियार तैयार कराए जाते थे और उनकी आपूर्ति छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल तथा ओडिशा के नक्सली संगठनों तक किए जाने के प्रमाण जांच एजेंसी को मिले हैं।

एटीएस के अनुसार भाकपा माओवादी से अलग होकर तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी (टीएसपीसी) का गठन करने के बाद बृजेश गंझू ने संगठन का बड़ा नेटवर्क खड़ा किया। कुछ वर्षों में संगठन में करीब 800 सदस्यों की टीम तैयार होने की बात सामने आई है। संगठन ग्रामीण युवाओं, स्थानीय नेटवर्क और माओवादी संगठनों से अलग हुए कैडरों को अपने साथ जोड़ता था।
शशिकांत के सुझाव पर शुरू की हथियार फैक्टरी
जांच एजेंसी के मुताबिक बृजेश गंझू का प्रमुख सहयोगी और टीएसपीसी का कमांडर 10 लाख रुपये का इनामी शशिकांत गंझू उर्फ आरिफ जी था। शशिकांत को हथियारों की अच्छी जानकारी होने की बात सामने आई है। वर्ष 2006 में माओवादी संगठन छोड़कर टीएसपीसी से जुड़ने वाले शशिकांत के सुझाव पर ही बृजेश ने अत्याधुनिक हथियार तैयार कराने का नेटवर्क खड़ा किया था। हथियारों की आपूर्ति से संगठन को बड़ी रकम मिलने की बात जांच में सामने आई है।
करीब दो वर्ष पहले पलामू में टीएसपीसी के श्रवण उरांव, प्रेम गंझू और शतु कुमार उर्फ शैलेंद्र को एके-47 समेत अन्य हथियारों के साथ गिरफ्तार किया गया था। जांच के अनुसार तीनों टीएसपीसी कमांडर आक्रमण गंझू के दस्ते से जुड़े थे।
50 से अधिक मुकदमों में वांछित है शशिकांत
एटीएस के अनुसार झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश के विभिन्न थानों में शशिकांत गंझू के खिलाफ 50 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। बृजेश गंझू के मारे जाने के बाद संगठन की कमान शशिकांत के हाथों में जाने की संभावना को लेकर जांच एजेंसियां उसके नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि टीएसपीसी में माओवादी संगठनों से अलग होने वाले कैडरों को तेजी से शामिल किया जाता था। नए सदस्यों को पोस्टरबाजी, लेवी वसूली और हथियारों के संचालन जैसे काम सौंपे जाते थे। चतरा, पलामू, लातेहार और कोयलांचल क्षेत्रों में संगठन पर लेवी वसूली तथा आपराधिक वारदातों में संलिप्त रहने के आरोप रहे हैं।
15 साल की उम्र में नक्सली संगठन से जुड़ा था बृजेश
एटीएस के मुताबिक बृजेश गंझू करीब 15 वर्ष की उम्र में नक्सलियों के बाल दस्ते में शामिल हो गया था। बाद में उसने अपना अलग संगठन खड़ा किया। वर्ष 2008 से 2015 के बीच कोयलांचल क्षेत्र में उसके इशारे पर लेवी की रकम पहुंचने की बात जांच में सामने आई है। वर्ष 2015 के बाद उस पर जांच एजेंसियों का शिकंजा कसना शुरू हुआ। वर्ष 2018 में टेरर फंडिंग मामले में नामजद होने के बाद संगठन के कई सक्रिय सदस्यों और जोनल कमांडरों की गिरफ्तारी तथा मुठभेड़ों में मौत के बाद संगठन कमजोर होता गया। वर्तमान में संगठन में करीब 20-25 सक्रिय सदस्यों के बचे होने की जानकारी सामने आई है।
पोस्टमार्टम के बाद शव झारखंड ले गया परिवार
मुठभेड़ के बाद रविवार देर रात बृजेश गंझू का भाई सुरेश गंझू वाराणसी पहुंचा। पोस्टमार्टम की कार्रवाई पूरी होने के बाद जांच एजेंसी की मौजूदगी में शव भाई और भांजे को सौंप दिया गया। परिजन पहले वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे, लेकिन सहमति नहीं बनने पर शव को झारखंड के चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र स्थित लुड्डू गांव ले जाया गया। बृजेश के भाई और पूर्व विधायक गणेश गंझू ने उसकी हत्या किए जाने का आरोप लगाया है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
14 राउंड फायरिंग में मारा गया था बृजेश
एटीएस के अनुसार लंका मैदान के पास हुई मुठभेड़ में कुल 14 राउंड फायरिंग हुई। 30 लाख रुपये के इनामी बृजेश के वाराणसी पहुंचने की सूचना पर एटीएस की गोरखपुर यूनिट भी सक्रिय हुई थी। वाराणसी और गोरखपुर यूनिट की संयुक्त टीम ने लंका मैदान के पास उसे और उसके एक साथी को घेरा था। पुलिस से घिरने के बाद बाइक से कूदकर बृजेश ने 30 और 32 बोर की पिस्टल से तीन राउंड फायर किए। जवाबी कार्रवाई में एटीएस ने 11 राउंड फायरिंग की, जिसमें बृजेश गंझू मारा गया।
कार्रवाई में एटीएस के उपाधीक्षक विपिन राय, गोरखपुर यूनिट के निरीक्षक विजय प्रताप सिंह, वाराणसी यूनिट के भारत भूषण तिवारी समेत अन्य पुलिसकर्मी शामिल रहे। फरार हुए युवक की तलाश और पूरे नेटवर्क की गतिविधियों को लेकर जांच एजेंसियां पड़ताल में जुटी हैं।

